Gold Price Outlook: पिछले कुछ दिनों में सोना और चांदी के बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली है। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरों ने दुनिया भर के बाजारों को राहत दी है, तो दूसरी तरफ निवेशक अभी भी पूरी तरह भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। वजह साफ है- पिछले तीन महीनों में कई बार समझौते की उम्मीद जगी, लेकिन बात आखिरी मुकाम तक नहीं पहुंच सकी। अब बाजार की नजर 19 जून पर है, जब स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
इसी बीच सोना और चांदी में भी बड़ी रिकवरी देखने को मिली है। केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, 11 जून को 4,024 डॉलर प्रति औंस तक फिसलने वाला सोना 15 जून तक करीब 7.6 फीसदी उछलकर 4,331 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी ने और भी शानदार वापसी की। चांदी 61.50 डॉलर प्रति औंस से करीब 15 फीसदी चढ़कर 70.55 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
आमतौर पर जब दुनिया में तनाव बढ़ता है तो निवेशक सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की तरफ भागते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग रही। अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से पहले सोना और चांदी में तेज गिरावट आई थी। इसके बाद निचले स्तरों पर खरीदारी शुरू हुई और कीमतों में अच्छी रिकवरी देखने को मिली।
हालांकि बाजार अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं है। निवेशकों को डर है कि अगर 19 जून को समझौते में कोई रुकावट आती है या फिर बातचीत आखिरी समय में अटक जाती है, तो बाजार का मूड एक बार फिर बदल सकता है।
सिर्फ अमेरिका-ईरान समझौता ही नहीं, बाजार की नजर 17 जून को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर भी टिकी हुई है। फेड का ब्याज दरों पर फैसला दुनिया भर के वित्तीय बाजारों की दिशा तय करता है। अगर फेड यह संकेत देता है कि महंगाई अभी भी चिंता का विषय है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहेंगी, तो सोना और चांदी पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं अगर ब्याज दरों में कटौती के संकेत मिलते हैं, तो कीमती धातुओं में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
हालिया रिकवरी के बावजूद सोना अभी भी अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में खरीदारी जरूर लौटी है, लेकिन अभी इसे मजबूत तेजी नहीं कहा जा सकता। चॉइस ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, तकनीकी चार्ट पर सोना अभी भी दबाव में दिखाई दे रहा है। कीमतें अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे बनी हुई हैं, जो कमजोरी का संकेत माना जाता है। सोने के लिए 154,237 रुपये और 157,890 रुपये महत्वपूर्ण स्तर माने जा रहे हैं। अगर सोना इन स्तरों को पार कर लेता है, तो तेजी और मजबूत हो सकती है। वहीं नीचे की तरफ 146,444 रुपये और 139,981 रुपये अहम सपोर्ट स्तर हैं।
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सोने के मुकाबले चांदी की तस्वीर थोड़ी बेहतर नजर आ रही है। इसकी बड़ी वजह औद्योगिक मांग है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई उद्योगों में चांदी का इस्तेमाल बढ़ रहा है। खासकर चीन से मांग मजबूत बनी हुई है। चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि चांदी में निचले स्तरों पर लगातार खरीदारी देखने को मिल रही है। तकनीकी संकेतक भी सुधार के संकेत दे रहे हैं। RSI और MACD जैसे इंडिकेटर बता रहे हैं कि चांदी में रिकवरी की कोशिश जारी है। चांदी के लिए 255,000 रुपये और 263,663 रुपये महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस हैं। अगर कीमतें इनके ऊपर निकलती हैं तो तेजी और मजबूत हो सकती है। वहीं 230,493 रुपये और 221,502 रुपये अहम सपोर्ट स्तर माने जा रहे हैं।
अगले सप्ताह निवेशकों की नजर सिर्फ दो चीजों पर रहने वाली है-17 जून को अमेरिकी फेड की बैठक और 19 जून को अमेरिका-ईरान समझौते पर संभावित हस्ताक्षर। अगर फेड नरम रुख अपनाता है और अमेरिका-ईरान समझौता तय समय पर हो जाता है, तो बाजार में जोखिम लेने की धारणा मजबूत हो सकती है। लेकिन अगर इनमें से किसी भी मोर्चे पर निराशा हाथ लगती है, तो सोना और चांदी दोनों में एक बार फिर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार का मूड यही कह रहा है कि सोना और चांदी में रिकवरी जरूर आई है, लेकिन निवेशकों को अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत है। अगले कुछ दिन ही तय करेंगे कि यह तेजी टिकाऊ है या फिर सिर्फ एक छोटी राहत वाली उछाल।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)