अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर बाजार में फिर चिंता बढ़ गई है, जिसका असर सीधे सोने की कीमतों पर दिखा। बुधवार को समझौते की उम्मीद में सोना तेजी से चढ़ा था, लेकिन गुरुवार को माहौल बदल गया और कीमतों में गिरावट आ गई। दरअसल, खबर आई कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर भेजने के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद तेल की कीमतें फिर चढ़ गईं, डॉलर मजबूत हुआ और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी ऊपर चली गई। इन सबका दबाव सोने पर देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 0.75 प्रतिशत टूटकर 4510 डॉलर के आसपास पहुंच गई।
कुछ दिन पहले तक बाजार को लग रहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बात बन सकती है। ईरान ने भी कहा था कि अमेरिका के नए प्रस्ताव से दोनों देशों के बीच कुछ दूरी कम हुई है। लेकिन बाद में रॉयटर्स की रिपोर्ट आई कि ईरान अपने हाई-ग्रेड यूरेनियम को बाहर भेजने के पक्ष में नहीं है। बताया गया कि ईरान के सुप्रीम लीडर ने इसे देश में ही रखने का निर्देश दिया है। बस यहीं से बाजार का मूड बदल गया। निवेशकों को लगा कि तनाव अभी जल्दी खत्म होने वाला नहीं है।
ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना पर भी बात कर रहा है। यह दुनिया का बेहद अहम तेल रूट है। अगर यहां तनाव बढ़ता है तो तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी डर से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम को नष्ट कर सकता है और होर्मुज पर कोई टोल नहीं लगना चाहिए।
इस बीच अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़े भी काफी मजबूत रहे। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आए, जिससे यह संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है। इसके बाद बाजार में यह डर बढ़ गया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरें बढ़ा सकता है। जब ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद बढ़ती है तो डॉलर मजबूत होता है और सोने में निवेश थोड़ा कमजोर पड़ जाता है। यही वजह है कि डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड दोनों ऊपर चले गए।
भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। गुरुवार को रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में RBI के दखल के बाद थोड़ी रिकवरी आई और रुपया 96.32 के आसपास आ गया। कमजोर रुपये का असर भारत में सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
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मिराए एसेट शेयरखान के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि अभी सोने की चाल काफी हद तक तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर करेगी। उनके मुताबिक, अगर तेल महंगा रहता है और डॉलर मजबूत बना रहता है तो सोने में बड़ी तेजी आना मुश्किल होगा।
प्रवीण सिंह का मानना है कि फिलहाल बाजार में 4365 डॉलर का स्तर अहम सपोर्ट है, जबकि ऊपर की तरफ 4610 और 4680 डॉलर पर मजबूत रुकावट देखने को मिल सकती है। उनका कहना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक ऊंचे स्तर पर बिकवाली का रुख बना रह सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)