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राहत का पिटारा खोल सकती है सरकार

Last Updated- December 10, 2022 | 7:13 PM IST

सीमेंट और स्टील जैसे जिंसों पर उत्पाद शुल्क कम किए जाने की घोषणा के बाद अब सरकार केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स उद्योग को राहत देने की तैयारी की भूमिका बना रही है।
यह राहत सीमा और उत्पाद शुल्क में बदलाव करके दिया जाएगा, जिसकी मांग उद्योग जगत कर रहा है। नैप्था पर सीमा शुल्क खत्म किए जाने की योजना बन रही है, जो इस समय 5 प्रतिशत है।
वहीं मोनो एथिल ग्लाइकॉल (एमईजी) पर उत्पाद शुल्क वर्तमान के 8 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ अन्य बदलावों की अनुसंशा भी की गई है।
पिछले सप्ताह जब वित्त मंत्री ने तीसरे राहत पैकेज की घोषणा की थी, उसके बाद केबिनेट सचिवालय ने अन्य विभागों और मंत्रालयों से आने वाले दिनों के लिए टिप्पणी मांगी थी। केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स विभाग ने कहा है, ‘वैश्विक मंदी के परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था भी मंदी की चपेट में है। केमिकल्स क्षेत्र उनमें से एक है, जिस पर इस मंदी का व्यापक असर पड़ा है।’
कीमतों में ज्यादा गिरावट की वजह से निर्यात मांगों में कमी आई है और घरेलू बाजार में भी मंदी है। इसकी वजह से केमिकल्स उद्योग को विस्तार योजनाएं टालनी पड़ी हैं और वे अपनी क्षमता से कम उत्पादन कर रही हैं। घरों, कार्यालयों, आटोमोबाइल कंपनियों रियल एस्टेट और टेक्सटाइल क्षेत्र से मांग में बहुत कमी आई है।
विस्कोज का उत्पादन करने वाली ग्रासिम, जिसका प्रयोग कपड़ा उद्योग में होता है, की बिक्री में तीसरी तिमाही के दौरान 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसको देखते हुए कंपनी ने अपना उत्पादन कम कर दिया है।
इस उद्योग से जुड़े एक विश्लेषक ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें जुलाई-08 के 147 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर अब 40-45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं हैं।  इसके साथ ही केमिकल्स, सॉल्वेंट, पॉलिमर्स और पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है। इस समय स्थिति यह है कि तमाम केमिकल्स की कीमतें 2002-03 के स्तर पर आ गई हैं।
कम खपत की वजह से रिफाइनिंग की क्षमता कम की जा रही है और यह दिखाया जा रहा है संयंत्र के रखरखाव के लिए ऐसा किया गया। आने वाले दिनों में और मंदी आने के भय से कीमतों में गिरावट आ रही है, जिससे स्टॉक भी कम हो रहा है।

First Published - March 7, 2009 | 4:13 PM IST

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