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सस्ते कच्चे तेल से सरकार ने की मोटी कमाई

Last Updated- December 12, 2022 | 12:03 AM IST

भारत ने सस्ती दरों पर खरीदे गए कच्चे तेल से तेजी से मोटी कमाई की है। देश के रणनीतिक भंडारों में रखे गए कच्चे तेल की बिक्री मंगलूरु रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स (एमआरपीएल) को बाजार भाव पर की गई है, जो औसतन 19 डॉलर प्रति बैरल के भाव खरीदा गया था।
भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिवर्ज (आईएसपीआरएल) के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) एचपीएस आहूजा ने कहा कि खाली हो चुके इस भंडार में जाकुग ग्रेड का कच्चा तेल है, जो अबूधाबी से लाया गया था और इसकी जगह सऊदी अरब से लाया गया कच्चा तेल रखा जाएगा।
आईएसपीआरएल सरकार नियंत्रित कंपनी है, जिसे देश के कच्चे तेल की भंडारण सुविधा के प्रबंधन का काम सौंपा गया है, जबकि एमआरपीएल एक सार्वजनिक उपक्रम है। दोनों पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आते हैैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड ने अगस्त, 2021 में खबर दी थी कि भारत के रणनीति पेट्रोलियम भंडारों (एसपीआर) में भंडारण की जगह को खाली किया जाएगा, जिससे इसका ज्यादा वाणिज्यिक इस्तेमाल हो सके। यह पहले से भंडारित कच्चे तेल की बिक्री करके किया जाएगा और आईएसपीआरएल के भंडारण क्षमता में से पट्टे योग्य ज्यादा जगह मुहैया कराई जाएगी।
भारत ऊर्जा मंच सेरावीक में संवाददाताओं से अलग से बातचीत करते हुए आहूजा ने कहा कि सरकार ने पहले ही एमआरपीएल में भंडारित 3,00,000 टन कच्चे तेल की बिक्री बाजार भाव पर कर दी है। इससे सरकार को मुनाफा कमाने में मदद मिली है, क्योंकि इसे 19 डॉलर प्रति बैरल के भाव खरीदा गया था। इस समय ब्रेंट क्रूड का कारोबार 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है।
आहूजा के मुताबिक एमआरपीएल दिसंबर के अंत तक शेष कच्चा तेल लेगी, उसके बाद पूरी 7,50,000 टन की भंडारण क्षमता को पट्टे पर दे दिया जाएगा।
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व को भरने की कवायद उस समय दोगुनी कर दी गई थी, जब अप्रैल और मई, 2020 में कच्चे तेल की वैश्विक कीमत कम हो गई थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक इसकी वजह से देश के खजाने में 5,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। यह अनुमान लगाया गया है कि इस अवधि के दौरान रणनीतिक भंडारों को भरने में जिस भाव कच्चे तेल की खरीद की गई, उसकी औसत कीमत 19 डॉलर प्रति बैरल थी, जो इस समय के तेल की कीमत का एक चौथाई है।
यह रणनीतिक भंडारण विशाखापत्तनम, मंगलौर और पदुर में है, जहां कुल 53.3 लाख टन (9.77 मिलियन बैरल) कच्चा तेल रखा गया है। विशाखापत्तमन की भंडारण क्षमता 13.3 लाख टन, मंगलौर की 15 लाख टन और पदुर की 25 लाख टन है। इन तीन परियोजनाओं की संयुक्त लागत बढ़कर 4,098.35 करोड़ रुपये हो गई थी। इन भंडारों से भारत के कच्चे तेल की करीब 9 से 10 दिन की मांग पूरी की जा सकती है।
आईएसपीआरएल के मंगलूरु केंद्र पर 7,50,000 टन क्षमता के दो कैवर्न हैैं। इस तरह का एक कैवर्न पहले ही अबूधाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) को सौंपा जा चुका है, जिसने भंडारण किया है।  मारत में हर साल करीब 2260 लाख टन (1,656.58 मिलियन बैरल) कच्चे तेल का आयात होता है। इससे भारत के कच्चे तेल की कुल जरूरत का करीब 84 प्रतिशत पूरा किया जाता है।

First Published - October 21, 2021 | 11:44 PM IST

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