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जमाखोरों ने 100 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाईं उप्र में आलू की कीमतें

Last Updated- December 10, 2022 | 9:20 PM IST

मध्य उत्तर प्रदेश में आलू की कीमतें मॉनसून की अनिश्चितताओं के रिकॉर्ड के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही है।
पिछले साल आलू की अधिकता के कारण हजारों किसान कई टन आलू खेतों में फेंकने के लिए बाध्य थे और अब पिछले पखवाड़े से कीमतों में बढ़ोतरी होती देखी जा रही है।
पिछले साल जो कीमतें 200 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर नहीं बढ़ पाई थीं वही अब इसमें सौ फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी देखी जा रही है और कटाई शुरू के सीजन में यह 500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छू रही है। खुदरा बाजार में आलू की कीमत 900 रुपये प्रति क्विंटल तक है।
कन्नौज, इटावा और फर्रूखाबाद के आलू किसानों ने पीक सीजन के दौरान आलू की प्रचुरता से बचने के उपाय के तौर पर परिपक्वता से पहले ही फसल की कटाई कर ली है। चंद्रशेखर कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर पी कटियार ने समझाते हुए कहा, ‘लगभग 35 प्रतिशत किसानों ने सामान्य समय से पहले ही कटाई जनवरी में ही कर ली है जिससे अब आपूर्ति में कमी देखी जा रही है।’ लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी की यही एकमात्र वजह नहीं है।
थोक व्यापारियों के मुताबिक, उनमें से कुछेक ने कोल्ड स्टोरेज में बड़े परिमाण में आलू का भंडारण कर लिया है और ज्यादा लाभ कमाने की आशा में वे फिलहाल बाजार में आलू लाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर इसे सही ठहराते हुए कहा, ‘अगर एक व्यापारी भंडारण नहीं करेगा तो कमाएगा क्या?’
कानपुर थोक विक्रेता संघ के अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के अनुसार, किसान मध्य प्रदेश और बिहार के बाजारों में अपने उत्पाद बेचने को तरजीह देते हैं जहां कीमतें स्थानीय बाजारों की तुलना में अधिक है। इससे घरेलू बाजार में आलू की कमी हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस सीजन में पश्चिम बंगाल में पैदावार कम होने से भी आलू की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा, ‘ऐसा पहली बार हुआ है कि बंगाल के व्यापारियों ने अपने राज्य के लिए आलू खरीदने के लिए फर्रूखाबाद का रुख किया है। कोल्ड स्टोरेज के मालिक सीधे-साीधे भारी परिमाण में आलू की खरीदारी कर रहे हैं।’
आलू कारोबारी संघ के सचिव सन्नू गंगवार कहते हैं कि व्यापारी गांव-गांव जाकर सीधे खेतों से आलू खरीद रहे हैं क्योंकि वहां कीमतें अपेक्षाकृत कम होती हैं। ऐसा लगता है कि कोल्ड स्टोरेज के मालिक पिछले साल हुई हानि की भरपाई आलू की जमाखोरी के जरिए करने का निर्णय किया है जबकि प्रशासन चुनाव की व्यवस्था करने में व्यस्त है।
भारतीय किसान यूनियन के सचिव रमेश सिंह कहते हैं कि कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है क्योंकि कारोबारी और बिचौलिए उपभोक्ताओं और किसानों की कीमत पर भारी लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘अभी भी परेशान किसान अपने उत्पदों को उपलब्घ कीमतों पर बेचने का सहारा ले रहे हैं ताकि बाद में कीमतों में होने वाली गिरावट से बचा जा सके।’

First Published - March 25, 2009 | 12:29 PM IST

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