कमोडिटी

बागवानी में आत्मनिर्भर बनेगा भारत: आयात घटाने के लिए हाइब्रिड बीजों और नई किस्मों पर जोर देगी सरकार

एनएएएस ने बागवानी आयात कम करने के लिए संकर बीजों और बेहतर ब्रीडिंग प्रोग्राम की वकालत की है, ताकि फलों और मसालों में आत्मनिर्भरता के साथ निर्यात बढ़े

Published by
संजीब मुखर्जी   
Last Updated- April 14, 2026 | 9:48 PM IST

राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (एनएएएस) ने कुछ खास बागवानी फसलों के आयात पर बढ़ती निर्भरता कम करने और वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अपने हालिया नीति पत्र में कई उपायों की वकालत की है। इन कदमों में बागवानी फसलों का ब्रीडिंग प्रोग्राम मजबूत बनाने,  सेब, अखरोट, हेजलनट और कीवी जैसी आयात पर निर्भर बागवानी फसलों की बेहतर किस्मों और संकर (हाइब्रिड) बीजों की प्राप्ति और औषधीय व सुगंधित पौधों में पादप संरक्षण के सीमित विकल्पों के समाधान के लिए कीटनाशकों के पंजीकरण और विनियमन को सुव्यवस्थित करना शामिल है।

इसमें महत्त्वपूर्ण फलों की लंबी अवधि की खेपों के लिए विशेष समुद्री मार्ग प्रोटोकॉल विकसित करने और उच्च निर्यात मांग वाले प्रसंस्करणऔर मूल्यवर्धित  उत्पादों के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का भी सुझाव दिया गया है।एनएएएस की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वर्तमान महानिदेशक डॉ. एमएल जाट कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बागवानी फसलों के कारोबार में एक अजीब बदलाव देखा जा रहा है।  बागवानी उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि के बावजूद पिछले कुछ वर्षों में ताजे फल और मसालों के आयात में वृद्धि हुई है।

इसमें कहा गया है कि पिछले 5 वर्षों में मसालों का आयात लगभग 18 प्रतिशत बढ़ा है, जो 2019-20 के 101.87 अरब रुपये से बढ़कर 2023-24 में 120.51 अरब रुपये हो गया है। यह 6.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर है। आयात की प्रमुख वस्तुओं में काली मिर्च, लौंग, स्पाइस ऑयल और ओलेओरेसिन और मिंट उत्पाद शामिल हैं। सेब, संतरे, अंगूर, कीवी और चेरी आदि  सहित ताजे फलों का आयात बिल पिछले 15 वर्षों में 8 गुना बढ़ा है।  यह 2009-10 के 28.43 अरब रुपये से बढ़कर 2023-24 में 226.64 अरब रुपये हो गया है। मांग और वास्तविक उत्पादन के बीच यह अंतर बागवानी के उत्पादन में  विरोधाभास को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर, कटाई के बाद के नुकसान को कम करके, और विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को सहायता प्रदान करके आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि आत्मनिर्भर बागवानी की क्षमता का निर्माण हो सके।’ फल और सब्जियों के प्रमुख उत्पादक होने के बावजूद, वैश्विक बाजार में भारत का निर्यात कम है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘भारत ने 2024-25 के दौरान 925.32 अरब रुपये के बागवानी उत्पादों का निर्यात किया, जिसमें मसालों का योगदान कुल निर्यात मूल्य का करीब 38 प्रतिशत था।

First Published : April 14, 2026 | 9:32 PM IST