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घटने लगे दाम, तो क्या दर बढ़ोतरी पर लगेगा विराम!

Last Updated- December 11, 2022 | 5:41 PM IST

महंगाई पर काबू पाने के लिए उठे सख्त कदमों और मांग घटने की वजह से कुछ महीनों पहले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे कुछ जिंसों जैसे खाद्य वस्तुओं और कुछ अहम इनपुट जैसे उर्वरकों के दाम कम होने लगे हैं। मिल रहे संकेतों से भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चक्र को रोक सकता है या इसे नए सिरे से व्यवस्थित कर सकता है।
मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई पर काबू पाने के लिए मई में रीपो दर में 40 आधार अंक की बढ़ोतरी की। उसके बाद जून की नीतिगत समीक्षा में 50 आधार अंक बढ़ाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया। समिति मुख्य रूप से प्रमुख महंगाई देखती है, जिसमें खाद्य व ईंधन की कीमत शामिल नहीं है। दक्षिण पूर्व मॉनसून का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय है। बेहतर बारिश खरीफ की अच्छी फसल सुनिश्चित करेगी और इससे आपूर्ति की चिंता कम होगी।
अब तक बारिश की मिली जुली स्थिति रही है। कुछ इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश हुई है, जबकि अन्य जगहों पर छिटपुट बारिश। 8 जुलाई को खरीफ की फसल का रकबा पिछले साल की तुलना में 9.3 प्रतिशत कम है। पिछले महीने रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर और एमपीसी के सदस्य माइकल पात्र ने संकेत दिया था कि खुदरा महंगाई में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, रिजर्व बैंक की कार्रवाई भी इसके बाद संशोधित हो सकती है।
प्राइमस  पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक श्रवण शेट्टी ने कहा कि सामान्य बारिश और कृषि जिंसों की कीमत में कमी से खाद्य महंगाई कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही कच्चे तेल की महंगाई में गिरावट आने के बाद से महंगाई पर लगाम लगने की संभावना है क्योंकि खाद्य व ईंधन की सीपीआई में हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है।

वैश्विक गिरावट
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक खाद्यान्न के बढ़ते वैश्विक दाम की चिंता अब कम होने लगी है। खाना बनाने में विश्व में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले तेल पाम ऑयल की कीमत अप्रैल के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में 45 प्रतिशत से ज्यादा कम हुई है। गेहूं की थोक कीमत मार्च के सर्वोच्च स्तर की तुलना में 35 प्रतिशत कम हुई है, जबकि मक्के की कीमत इस साल के सर्वोच्च स्तर से 30 प्रतिशत कम हुई है।

खाद्य तेल और तिलहन
वैश्विक बाजारों में जून से प्रमुख खाद्य तेलों की कीमत गिर रही है, जिससे घरेलू कीमत कम हुई है। 8 जून और 8 जुलाई के बीच के आंकड़ों के मुताबिक भारत में सबसे ज्यादा खपत वाले पाम ऑयल की कीमत करीब 31.70 प्रतिशत कम हुई है। सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल की कीमत क्रमशः 20 प्रतिशत और 15 प्रतिशत कम हुई है। गोदरेज एग्रोवेट में सीईओ सौगात नियोगी ने कहा,  ’20 जून और 5 जुलाई के बीच पाम आयल की कीमत वैश्विक रूप से 5,370 रिंगिट से गिरकर 3,780 रिंगिट पर आ गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से घबराहट में बिकवाली की वजह से आई है। वैश्विक मंदी के डर से मांग भी घटी है।’

कपास
मई 2022 की शुरुआत में घरेलू बाजार में कपास की कीमत 50,330 रुपये प्रति बेल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। वहीं इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 11.5 साल के शीर्ष स्तर 155.95 सेंट्स प्रति पाउंड थी। ओरिगो ई-मंडी में एजीएम रिसर्च तरुण सत्संगी ने कहा, ‘2022 के अंत तक कपास की कीमत गिरकर 30,000 रुपये प्रति बेल हो जाएगी। मांग घटने, अमेरिकी डॉलर की स्थिति, वैश्विक मंदी के डर और बेहतर फसल होने की वजह से आने वाले सप्ताह से लेकर आने वाले महीनों में कीमतों में कमी के संकेत हैं।’

गेहूं, चावल व मोटे अनाज
वैश्विक बाजार के असर और सरकार के कदमो से गेहूं, चावल और मक्के जैसे प्रमुख घरेलू अनाज की कीमत में गिरावट आ रही है, जिसकी कीमत अप्रैल और मई में कई साल के शीर्ष स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि अभी भी इसकी कीमत पिछले साल से ज्यादा है।
व्यापार से  जुड़े सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में गेहूं की कीमत 2,300-2,350 रुपये प्रति क्विंटल है, जो अप्रैल मई के 2,500 के स्तर से कम है, लेकिन इससे कम होने की संभावना सीमित है। ओरिगो कमोडिटीज ने एक शोध रिपोर्ट में कहा है, ‘गर्मी के थपेड़ों की वजह से गेहूं के कम उत्पादन, सरकार के पास कम स्टॉक और कम खरीद, पीडीएस के लिए कम आवंटन और खुले बाजार में बिक्री की सीमित संभावना की वजह से गेहूं के दाम को समर्थन मिल सकता है।’

यूरिया व अन्य उर्वरक
मई 2022 में आयातित यूरिया की कीमत दिसंबर के शीर्ष स्तर की तुलना में 27 प्रतिशत कम हुई है। बहरहाल पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अभी भी कीमत 95.4 प्रतिशत ज्यादा है। भारत में खाद के सालाना इस्तेमाल का करीब 30 प्रतिशत आयात होता है।

First Published - July 10, 2022 | 11:47 PM IST

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