त्योहारी सीजन में अगर आप घर में रखे पुराने गोल्ड ज्वैलरी की सफाई या पॉलिश करवाने के बारे में सोच रहे हैं, तो उस पर हॉलमार्क है या नहीं ये जरूर देंख लें। बता दें कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग को पिछले साल, जून 2021 से अनिवार्य कर दिया था।
इसलिए ग्राहकों को इस बात का ध्यान देना होगा की उनकी ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग है या नहीं।
अगर आपकी ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग का निशान नहीं हैं तो भी आप इसे बेच सकते हैं। यदि आप अपनी ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग का निशान लगवाना चाहते हैं, तो ये भी संभव हैं।
आइए, जानते है कैसे हॉलमार्किंग का निशान लगवाया जा सकता है…
गहनों पर हॉलमार्किंग करवाने के लिए आप किसी ज्वैलर की मदद ले सकते हैं। ऐसा करने के लिए उसे एक निश्चित शुल्क अदा करना पड़ेगा।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रेल 2022 से 31 जुलाई 2022 तक लगभग 3.7 करोड़ ज्वैलरी को हॉलमार्क किया गया था। सोने के गहनों की अनिवार्य हॉलमार्किंग करने का कानून पिछले साल 16 जून से लागू हुआ था।
बता दें कि गोल्ड हॉलमार्किंग के नियम केवल ज्वैलर्स के लिए हैं। कोई भी ज्वैलर अपने ग्राहकों को बिना हॉलमार्किंग वाली गोल्ड ज्वेलरी नहीं बेच सकता है।
अगर ग्राहकों के पास पहले से ही बिना हॉलमार्किंग वाली ज्वेलरी है तो उस पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और साथ ही उसे आसानी से बेचा भी जा सकेगा। बता दें कि अगर कोई सुनार ग्राहक को सोना खरीदने या एक्सचेंज करने से मना करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हॉलमार्क के बावजूद सोने की शुद्धता से असंतुष्ट होने पर क्या करें?
गहनों को लेकर किसी भी तरह की ठगी को रोकने के लिए, सरकार ने हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाया है। अगर कोई ग्राहक गहनों पर हॉलमार्क होने के बावजूद भी सोने की शुद्धता से असंतुष्ट है, तो वह हॉलमार्किंग सेंटर में इसकी जांच करा सकता है। जांच के दौरान अगर ग्राहक की चुनौती सही साबित होती है, तो फिर ज्वैलर के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान है। इसके अलावा ग्राहक को मुआवजा भी दिया जाएगा।