दुनिया के सबसे बड़े फाइबर उत्पादक भारत में कपास की खेती वर्ष 2022 में 15 प्रतिश तक बढ़कर सर्वकालिक शीर्ष स्तर पर पहुंच सकती है, क्योंकि दामदार दाम किसानों को अन्य फसलों से इस ओर रुख करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उद्योग के एक संगठन ने यह जानकारी दी है।
अधिक उत्पादन से कपास की वैश्विक और स्थानीय दाम वृद्धि में नरमी लाने में मदद मिल सकती है, जिससे एशिया के परिधान विनिर्माताओं को नुकसान हो रहा है।
भारतीय कपास संघ के अध्यक्ष अतुल गनात्रा ने कहा कि भारत में कपास का रकबा पिछले साल की तुलना में 15 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, क्योंकि यह फसल अन्य विकल्पों के मुकाबले में कहीं बेहतर प्रतिफल दे रही है।
पिछले एक साल में स्थानीय दाम दोगुनी से भी ज्यादा हो चुके हैं, क्योंकि कटाई के दौरान भारी बारिश से वर्ष 2021 की फसल एक दशक के सबसे निम्नतम स्तर पर आ गई है।
देश में कपास के रकबे में 15 प्रतिशत के इजाफ से यह वर्ष 2022 में बढ़कर करीब 1.38 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा, जो पिछले साल 1.2 करोड़ हेक्टेयर था। भारतीय कपास संघ को उम्मीद है कि कपास के रकबे में सर्वाधिक विस्तार गुजरात और महाराष्ट्र होगा, जिनका देश के उत्पादन में लगभग आधा योदान होता है।
गुजरात के मोरबी के किसान जगदीश मगन ने कहा कि पिछले साल मैंने 21 एकड़ जमीन पर कपास और अपनी बाकी 10 एकड़ जमीन पर मूंगफली उगाई थी। चूंकि कपास के दाम अधिक हैं, इसलिए इस साल अपनी पूरी जमीन पर मैं केवल कपास की ही खेती करूंगा।
अधिकांश भारतीय किसान जून में मॉनसून की बारिश की शुरुआत में कपास बुआई शुरू करते हैं, हालांकि सिंचाई वाले कुछ खेतों में यह बुआई मई की शुरुआत में आरंभ हो जाती है।
महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और राजस्थान जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में तिलहन और दलहन की फाइबर के साथ प्रतिस्पर्धा होती है।