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काली मिर्च का शुध्द आयातक बना भारत

Last Updated- December 11, 2022 | 12:25 PM IST

चालू वित्त वर्ष में भारत काली मिर्च का शुध्द आयातक बन सकता है क्योंकि घरेलू और वैश्विक बाजारों की कीमतों का अंतर स्पष्ट तौर पर भारी मात्रा में काली मिर्च के आयात के पक्ष में हैं।
जनवरी 2009 से भारतीय और वैश्विक कीमतों, खास तौर से वियतनाम के काली मिर्च की कीमतों , में भारी फर्क है जिससे मूल्य संवर्ध्दित करने वाले उद्योग आयात की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
औसतन, काली मिर्च की भारतीय कीमतें लगातार पूरे साल 400 से 500 डॉलर अधिक रही हैं। कल वियतनाम में एएसटीए ग्रेड की कीली मिर्च की कीमतें 2,130 डॉलर प्रति टन थीं जबकि भारतीय कीमतें 2,750 डॉलर प्रति टन थीं।
वियतनाम की रिपोर्ट के अनुसार, वहां के निर्यातकों ने जून से सितंबर अवधि के लिए काली मिर्च के सौदे 2,075 डॉलर प्रति टन पर भी किया है। यूरोप और अमेरिका दोनों वियतनाम में काफी सक्रिय हैं क्योंकि वर्तमान में वहां की कीमतें सबसे कम हैं। जुलाई से दिसंबर की अवधि के लिए इंडोनेशिया भी 2,125 डॉलर की कीमतों की पेशकश कर रहा है।
भारतीय बाजार सटोरिया आधारित कारोबार की गिरफ्त में है जिसका अंतरराष्ट्रीय बाजार परिस्थितियों से कोई लेना-देना नहीं है। वायदा मंचों पर सटोरिया कारोबार की वजह से भारतीय और वैश्विक काली मिर्च की कीमतों में इतना फर्क बना है। इससे पुन:निर्यात के लिए घरेलू बाजार में भारी मात्रा में काली मिर्च का आयात होना तय हो गया है।
सूत्रों ने बताया कि ऐसा संभव है कि भारत से किए जाने वाले काली मिर्च के निर्यात का 70 से 80 फीसदी आयातित काली मिर्च का है। ऐसा पहली बार देखा जा रहा है कि भारत काली मिर्च का शुध्द आयातक बनेगा।
कारोबारियों ने बताया कि घरेलू बाजार काली मिर्च की बिक्री को समर्थन देता है क्योंकि अन्य उत्पादक देशों की तुलना में भारतीय किसानों को 30 से 40 रुपये अधिक मिलते हैं। अधिक घरेलू कीमतों का फायदा उठाने के लिए भंडार की हेजिंग के विकल्प का चुनाव करना बेहतर है।
गरमी बढ़ने के कारण अगले दो-तीन सप्ताह में काली मिर्च की घरेलू मांग में कमी आने की संभावना है। उनके अनुसार, इस महीने के अंत तक कीमतों के नरम होने की पूरी संभावना है।
काली मिर्च की कीमतें भारत में अधिक है इसलिए निर्यात का योगदान इसमें काफी कम रहेगा और घरेलू बाजार के आधार पर इसकी कीमतें निर्धारित होंगी। इसलिए, सटोंरियों के लाभ कमा कर एक बार बाजार से बाहर होने के बाद कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से कमी आ सकती है।

First Published - May 8, 2009 | 11:15 PM IST

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