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भारतीय कच्चा तेल 50 डॉलर के पार

Last Updated- December 10, 2022 | 9:20 PM IST

पिछले चार महीनों में पहली बार भारतीय कच्चे तेल के भाव ने 50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार किया है।
इस कारण तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ा है और वह नेप्था और विमानन ईंधन (एटीएफ) की कीमतें बढ़ाने का इरादा कर रही हैं।
भारतीय कच्चे तेल का भाव सोमवार को 1.26 डॉलर प्रति बैरल बढ़ कर 50.46 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया जो 12 नवंबर 2008 के बाद की सबसे अधिक कीमत है।
यद्यपि प्रति बैरल औसत कीमत इस तिमाही (43.91 डॉलर प्रति बैरल) में पिछली तिमाही के 53.80 डॉलर के मुकाबले कम है लेकिन मार्च की 44.69 डॉलर प्रति बैरल की औसत कीमत जनवरी के 44.02 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में कम है।
जनवरी से रुपये में आई चार प्रतिशत की कमजोरी ने कीमतों में इजाफा किया है। पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और एलपीजी के कीमतों की उच्चतम सीमा तय होने से तेल कंपनियां इनकी कीमतों में बढ़ोतरी नहीं कर सकती हैं। नेप्था और फरनेस ऑयल की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं।
जनवरी से नेप्था की कीमतें 35 प्रतिशत बढ़ कर 25,012 रुपये प्रति टन हो गई हैं जबकि फरनेस ऑयल की कीमतों में 12.65 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। कंपनियों ने 16 मार्च से एटीएफ की कीमतें भी 158 रुपये प्रति किलोलीटर बढ़ा कर 27,275 रुपये कर दी है।
एटीएफ की कीमतों में यह बढ़ोतरी दो महीने के अंतराल के बाद की गई है। इसका प्रभाव महंगाई पर पड़ सकता है जो 7 मार्च को समाप्त हुए हफ्ते में 0.44 प्रतिशत के रिकॉर्ड निम्न स्तर पर था। कुछ विश्लेषकों ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
हालांकि, ऐसा संसदीय चुनावों के बाद ही होगा। एडलवाइस सिक्योरिटीज के नीरज मानसिंगका ने कहा, ‘इससे (कच्चे तेल की कीमतें 50 डॉलर होने से) कंपनियों के उन उत्पादों का मुनाफा प्रभावित होगा जिनकी उच्चतम सीमा तय है। उदाहरण के लिए, पेट्रोल, एलपीजी और केरासिन की अंडर रिकवरी बढ़ेगी जबकि डीजल की ओवर रिकवरी घटेगी। हालांकि, मुक्त उत्पादों पर होने वाला लाभ मूल्य समायोजन के जरिये जारी रहेगा।’
वर्तमान वर्ष में छूट वाले उत्पादों की बिक्री से होने वाले घाटे के कारण इन कंपनियों की अंडर रिकवरी 1,03,908 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। तेल कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘तेल की कीमतों को 50 डॉलर की सीमा पार किए एक दिन ही बीते हैं। यह देखना जरूरी है कि यह चलन बना रहता है या नहीं।’
प्राइसवाटरहाउसकूपर्स के एसोसिएट निदेशक दीपक मीरकर ने कहा, ‘जब तक अंडर रिकवरी की भरपाई समय पर नहीं होती तब तक तेल कंपनियों का लाभ प्रवित होगा। नेप्था और फरनेस ऑयल के मूल्य बढ़ने से उर्वरक और पावर उद्योग प्रभावित होंगे। उर्वरक कंपनियों के लिए नेप्था गैस के मुकाबले सस्ती साबित हो रही थीं। नेप्था की कीमतों में अधिक बढ़ोतरी से उर्वरक पर दी जाने छूट बढ़ सकती है।’
बढ़ेंगी नेप्था और एटीएफ की कीमतें!
भारतीय कच्चे तेल का भाव सोमवार को 1.26 डॉलर प्रति बैरल बढ़ कर 50.46 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया
कीमतें 12 नवंबर 2008 के बाद के उच्चतम स्तर पर
जनवरी से रुपये में आई 4 प्रतिशत की कमजोरी ने कीमतों में इजाफा किया
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो बढ़ सकती हैं पेट्रोल की कीमतें
छूट वाले उत्पादों की बिक्री से कंपनियों की अंडर रिकवरी 1,03,908 करोड़ रुपये  होने का अनुमान

First Published - March 25, 2009 | 12:25 PM IST

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