वैश्विक बाजार में कोयले की कीमत में बढ़ोतरी की वजह से भारत में आयात कम हुआ है। चालू वित्त वर्ष के 11 महीनों के दौरान कोयले का कुल आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 8.76 प्रतिशत कम हुआ है। हालांकि इस दौरान कोकिंग कोल का आयात बढ़ा है, लेकिन गैर कोकिंग कोल के आयात में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
वैश्विक बाजार में कोयले की कीमत पिछले सप्ताह 400 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई। रूस यूक्रेन युद्ध की वजह से धातुओं व ईंधन के दाम बढ़े हैं, जिनमें ब्रेंट क्रूड और कोयला भी शामिल है। कोयले की वैश्विक आपूर्ति में रूस की हिस्सेदारी 10 से 15 प्रतिशत है। बहरहाल भारत में कोयले की मांग की आपूर्ति ऑस्ट्रेलिया व इंडोनेशिया के कोयले से होती है।
वैश्विक दाम में बढ़ोतरी के साथ पिछले महीने में कोयले के आयात में गिरावट और घरेलू आपूर्ति में बढ़ोतरी शुरू हुई।
फरवरी महीने में कोकिंग कोल का आयात 20 प्रतिशत और गैर कोकिंग कोल का आयात 22 प्रतिशत कम हुआ है। कोकिंग कोल का इस्तेमाल धातु क्षेत्र में होता है जबकि नॉन कोकिंग या थर्मल कोल का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में होता है।
वहीं इसी महीने के दौरान कोयले का उत्पादन 3 प्रतिशत बढ़ा है। यह ऐसे समय में हुआ जब बिजली की मांग बढ़ रही है और ताप बिजली इकाइयों में कोयले का स्टॉक कम होकर 9 दिन के लिए रह गया है।
सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने हाल में एक बयान में कहा था कि उसने बिजली क्षेत्र को 3 मार्च को ऐतिहासिक उच्च स्तर पर 49.3 करोड़ टन कोयले की आपूर्ति की है, जो पहले के वित्त वर्ष 19 के 49.15 करोड़ टन रिकॉर्ड से ज्यादा है।
कंपनी ने कहा कि अप्रैल 21 से फरवरी 22 के दौरान सीआईएल ने पिछले साल की समान अवधि की तुलना में बिजली क्षेत्र को 9 करोड़ टन ज्यादा कोयले की आपूर्ति की है।