इस सप्ताह के अंत में दिल्ली में होने जा रहे प्रीमियर एनर्जी कॉन्फ्रेंस सेरावीक में भारत कच्चे तेल की कम कीमत की वकालत करेगा। भारत के संभावित कदमों के बारे में जानने वाले तेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतें पहले ही करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के चरम बिंदु पर पहुंच चुकी हैं।’
इस साल का सेरावीक ऐसे समय में हो रहा है, जब तेल के वैश्विक दाम ऐतिहासिक उच्च स्तर पर चल रहे हैं। इस समय कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल है। भारत इस बैठक का आयोजक होगा, जिसमें विश्व के सबसे बड़े तेल उत्पादक सऊदी अरब और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
इसमेंं अबूधाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के समूह मुख्य कार्याधिकारी सुल्तान अल जबार, सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान अल सऊद और कतर पेट्रोलियम के अध्यक्ष और मुख्य कार्याधिकारी साद शेरिदा अल काबी का संबोधन होगा।
तेल मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ‘आगामी सेरावीक में कच्चे तेल का वैश्विक दाम एजेंडे में शीर्ष पर होगा। भारत ने तेल उत्पादक देशों के साथ कई दौर की बातचीत की है और हमारी स्थिति उनके सामने रखी गई है।’
सेरावीक एजेंडा दस्तावेज के मुताबिक इसमें एक सत्र तेल की उच्च कीमतों के असर के बारे में है। ओपेक के महासचिव मोहम्मद सानुसी बरकिंडो इस सत्र को संबोधित कर सकते हैं। सेरावीक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल व गैल उद्योग के 20 वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक होने की भी संभावना है।
एजेंडा दस्तावेज में कहा गया है, ‘इसके पहले तेल की उच्च कीमतों ने लागत प्रतिस्पर्धा में वृद्धि की है, और कम कार्बन के विकल्पों और इनमें निवेशको ज्यादा आकर्षक बना दिया है। तेल और गैस की कीमत अब कई वर्षों के शीर्ष स्तर पर है, जिससे नीति निर्माताओं व पर्यावरणविदों को बदलाव को और गति देने का अवसर मिला है।’
सेरावीक का अन्य सत्र तेल व गैस के खपत वाले देशों और उत्पादक देशों के हितों के संतुलन पर होगा। एजेंडा दस्तावेज में कहा गया है, ‘ऐतिहासिक रूप से मांग का दबाव लंबे चक्र में अहम उत्प्रेरक रहा है, जिसकी घाटे और कीमतों की बढ़ोतरी में अहम भूमिका रही है। लेकिन यह स्थिति बदल रही है क्योंकि आपूर्ति के पक्ष की गतिविधियां अहम उत्प्रेरक हो गई हैं।’
कच्चे तेल के वैश्विक दाम बढ़ रहे हैं और 85 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रहे हैं। यह भारत के लिए कीमत के आरामदायक स्तर की तुलना में बहुत ज्यादा है। कीमतें मार्च, 2020 के 19 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर से बढऩी शुरू हुईं और इसमें बढ़ोतरी की वजह से भारतीयों के परिवहन लागत में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह से भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए स्थितियां कठिन हो गई हैं।