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तेल के बढ़े दाम पर भारत का कड़ा रुख

Last Updated- December 12, 2022 | 12:06 AM IST

तेल उत्पादक देशों के साथ चर्चा के दौरान भारत ने आक्रामक रुख दिखाते हुए कच्चे तेल की कीमत कम किए जाने पर जोर दिया है। सेरावीक की ओर से आयोजित इंडिया एनर्जी फोरम में बोलते हुए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) और कंप्रेस्ड प्राकृतिक गैस (सीएनजी) की कीमतें इस समय सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई हैं, जो तेल आपूर्ति करने वाले देशों के नियमन की वजह से हुआ है।
पुरी ने कहा, ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्वच्छ, वहनीय, विश्वसनीय, सतत ऊर्जा की जरूरत है, जिससे महामारी के बाद इसे गति दी जा सके।’
पुरी ने कहा, ‘हमारे कुल आयात बिल में कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है। हमारा तेल आयात बिल बढ़कर 8.8 अरब डॉलर (जून, 2020 को समाप्त तिमाही में) से बढ़कर जून, 2021 तिमाही में 24 अरब डॉलर हो गया है। कीमतों में बढ़ोतरी का असर सभी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, लेकिन भारत जैसे बड़े विकासशील देशों में आप देख सकते हैं कि इसकी वजह से महंगाई बढ़ी है। साथ ही तेल के दाम बढऩे से वस्तुओं के उत्पादन और ढुलाई की लागत बढ़ गई है।’
उन्होंने कहा, ‘अगर कीमतें पहले से अनुमानित, स्थिर और वहनीय नहीं रहती हैैं तो आर्थिक रिकवरी क्षणभंगुर हो सकती है। अगर आर्थिक गतिविधियां सुस्त होती हैं तो इससे उत्पादकों पर भी असर पड़ेगा।’  
उन्होंने याद दिलाया कि जब मार्च, 2020 में लॉकडाउन किया गया था तो किस तरह से कच्चे तेल के वैश्विक दाम गिरकर 19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे। पुरी ने कहा कि मौजूदा स्थिति चेतावनी है और कहा कि अगर कीमतें नियंत्रण में नहीं लाई जाती हैं तो वैश्विक आर्थिक रिकवरी अस्थिर हो सकती है।
पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा को भी याद दिलाया कि भारत स्वतंत्रता के 100 साल बाद 2047 तक ऊर्जा के हिसाब से आत्मनिर्भर देश हो जाएगा। उन्होंने देश के घरेलू उत्पादन बढ़ाए जाने पर जोर देते हुए कहा, ‘हम वह सब कुछ करेंगे, जिससे भारत में अन्वेषण व उत्पादन को बढ़ाया जा सके।’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संघठन और उसके सहयोगी देश (ओपेक प्लस) को खपत करने वाले देशों की धारणा को समझना चाहिए।
बाद के एक सत्र में ओपेक के महासचिव मोहम्मद सांसी बरकिंडो, पेट्रोलियम सचिव तरुण कपूर ने कहा कि कीमतों में उतार-चढ़ाव उत्पादक और उपभोक्ता दोनों के हित में नहीं है।
कपूर ने कहा, ‘यह काम नहीं करता। प्राकृतिक गैस की कीमत बढ़ गई है। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का अंतर महज 5 प्रतिशत है, लेकिन कीमत 10गुना बढ़ गई है।’ कपूर ने कहा कि उच्च कीमतों की वजह से भारत को अपनी ऊर्जा योजना के बारे में फिर से सोचना पड़ेगा, जहां प्राकृतिक गैस को ज्यादा प्रदूषण वाले कोयले के विकल्प के रूप में देखा जा रहा था।

First Published - October 20, 2021 | 11:33 PM IST

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