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चीनी आयात शुल्क समाप्ति का इस्मा ने किया विरोध

Last Updated- December 10, 2022 | 9:14 PM IST

सरकार द्वारा सफेद चीनी के शुल्क रहित आयात की अनुमति देने का घरेलू चीनी उद्योग ने भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) के जरिये सख्त विरोध किया है।
इस्मा के अनुसार, सरकार के इस कदम से चीनी की कीमतें कम होंगी जिससे गन्ने की कीमत चुकाने की उद्योग की क्षमता प्रभावित होगी। घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर सरकार रिफाइंड चीनी पर लगने वाला आयात शुल्क 60 प्रतिशत से घटा कर शून्य करने पर विचार कर रही है।
उत्पादन में कमी की आशंकाओं से चीनी की खुदरा कीमतें लगभग 30 प्रतिशत बढ़ कर 26 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं। इस्मा के अनुसार, साल 2008-09 सीजन में चीनी उत्पादन चार वर्षों में सबसे कम, 155 लाख टन होने का अनुमान है जो पिछले सीजन के उत्पादन की तुलना में 45 प्रतिशत कम है।
हालांकि, 80 लाख टन के पिछले भंडार और 15 लाख टन चीनी के आयात के साथ ही इस सीजन में चीनी की कुल उपलब्धता 250 लाख टन की होगी जबकि खपत 225 लाख टन होने का अनुमान है।
बलरामपुर चीनी मिल्स और इस्मा के उपाध्यक्ष विवेक सरावगी ने कहा, ‘शून्य शुल्क पर कच्ची चीनी का किया गया आयात ब्राजील के किसानों के लिए राहत की बात होगी। अगर ऐसा होता है तो भारतीय किसान बुरी तरह प्रभावित होंगे। इसके अलावा, घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। ‘
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बाद ब्राजील गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल की जगह चीनी उत्पादन में कर सकता है। परिणामस्वरूप उत्पादन बढ़ेगा। इस्मा के अध्यक्ष समीर सोमैया ने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।
उन्होंने कहा, ‘मूल्य नियंत्रण से केवल थोक उपभोक्ताओं जैसे खाद्य प्रसंस्करण करने वालों और मिठाई बनाने वालों को लाभ होगा।’ केपीएमजी के एक अध्ययन में पाया गया कि घरेलू खपत में इन संस्थागत खरीदारों की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत की है।
गन्ने की कीमतों के साथ ही चीनी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। सोमैया ने कहा, ‘हम चीनी की कीमतों को गन्ने की कीमतों से अलग नहीं कर सकते।’ देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की कीमतें 15 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा कर 140 रुपये कर दी गई थी।
बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में छूट के साथ चीनी की भंडार सीमा पर निर्णय लेने पर विवश किया। निर्यात पर दी जाने वाली माल भाड़ा सहायता भी हटा ली गई। थोक मूल्य सूचकांक में चीनी की हिस्सेदारी 3.62 प्रतिशत की है।
इस्मा के अधिकारियों ने बताया कि भंडार सीमा की घोषणा के बाद चीनी की की कीमतों (एक्स-फैक्ट्री) में 150 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई है।

First Published - March 23, 2009 | 11:24 PM IST

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