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‘खेत बचाओ अभियान’ आज से शुरू, कृ​षि विशेषज्ञ गांव-गांव पहुंचकर किसानों को सिखाएंगे खेती के तरीके

1 से 30 जून तक देश भर में चलेगा यह अभियान।  किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बोआई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत खेती के तरीके सिखाए जाएंगे

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- June 01, 2026 | 7:42 PM IST

Khet Bachao Abhiyan Launches: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के ग्राम रमासिया से ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया। यह अभियान 1 से 30 जून तक देश भर में चलेगा। इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें और जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बोआई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत खेती के तरीके सिखाए जाएंगे।

जरूरत के अनुसार उर्वरक का प्रयोग करें

इस अभियान के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने किसानों से अपील की कि वे अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग न करें, बल्कि मिट्टी की जांच के आधार पर जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि ज्यादा रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन और खेती की लागत पर पड़ता है। उन्होंने किसानों को संदेश दिया कि मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा।

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सॉयल हेल्थ कार्ड से घटेगी खेती की लागत

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि हर किसान का सॉयल हेल्थ कार्ड बनना जरूरी है, ताकि किसान अपनी जमीन की जरूरत समझकर खाद का उपयोग करे। इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी। सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका मतलब जरूरत से ज्यादा उपयोग नहीं है। सही मात्रा में खाद का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है।

उन्होंने कहा कि खेती को लाभकारी बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। सोयाबीन, धान और दलहन फसलों के लिए क्षेत्र में विशेष प्रदर्शन किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक बोआई, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीक और पानी बचाने वाली खेती के तरीके सिखाए जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

First Published : June 1, 2026 | 7:42 PM IST