तेल विपणन कंपनियां इस समय भारी घाटे से गुजर रही हैं, वहीं भारत के हर इलाके में ईंधन की कमी है। इसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और हरियाणा सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। सूत्रों ने कहा कि ओएमसी की अंडर रिकवरी इस समय डीजल पर 20 से 25 रुपये प्रति लीटर है और पेट्रोल की 14 से 18 रुपये प्रति लीटर है। वहीं सरकार और सरकार संचालित कंपनियों ने किसी संकट या तेल की उपलब्धता कम होने की खबर से इनकार किया है। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा कमी की बड़ी वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज और नयारा एनर्जी जैसी निजी क्षेत्र के कारोबारियों द्वारा बिक्री बंद करने की वजह से है। साथ ही भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपी सीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति भी कम है।
ईंधन की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि को स्वीकार करते हुए बीपीसीएल ने ट्वीट किया कि राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पेट्रोल व डीजल की मांग में मात्रा के हिसाब से जून के पहले पखवाड़े में क्रमशः 63 प्रतिशत और 43 प्रतिशत की कमी आई है।
सभी 3 सरकारी कंपनियों, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल औऱ एचपीसीएल ने कहा है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है, भले ही निजी कारोबारियों द्वारा आपूर्ति रोके जाने के बाद मांग बढ़ी है।
आल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (एआईपीडीए) के अजय बंसल ने कहा, ‘इस समय हर इलाके में कमी है। खासकर बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल पंपों पर कमी है। हमने इस मसले को उठाया है और इस मसले का समाधान जल्द कर लिया जाएगा।’ डीलरों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनियां आपूर्ति में कटौती कर रही हैं। फेडरेशन आफ आल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स (एफएआईपीटी) के अशोक बधवार ने कहा, ‘एचपीसीएल जैसी कंपनियां पहले जितना आपूर्ति कर रही थीं, उसका आधा आपूर्ति कर रही हैं। वहीं निजी कंपनियों ने आपूर्ति बंद कर दी है, जिसकी वजह से मौजूदा संकट औऱ बढ़ गया है।’ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 21 मई को पेट्रोल पर 8 रुपये लीटर और डीजल पर 6 रुपये लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती करने की घोषणा की थी, उसके बाद से ईंधन के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
मुंबई के एक विश्लेषक ने कहा, ‘अगर कच्चे तेल का मौजूदा भाव जारी रहता है तो कंपनियों की अंडररिकवरी 1.89 लाख करोड़ रुपये हो सकती है, जिसमें डीजल से 1.07 लाख करोड़ रुपये औऱ पेट्रोल से 42,700 करोड़ रुपये अंडररिकवरी शामिल है। वहीं तरलीकृत पेट्रोलियम गैस पर 39,000 करोड़ रुपये अंडररिकवरी हो सकती है।’