चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए सरकार मिलों और व्यापारियों के स्टॉक होल्डिंग लिमिट जारी करने की खबर से चीनी की बढ़ती कीमतें लुढक़ गई।
इस कदम का नतीजा यह हुआ है कि चीनी वायदा भाव में लोअर सर्किट लग गया। चीनी की कीमतों में गिरावट हाजिर बाजार में भी देखने को मिली। इस साल चीनी उत्पादन कम होने की खबर से पिछले एक महीने के दौरान चीनी की कीमतों में 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
छह महीने पहले चीनी के दाम 1680 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास थे, जबकि इस समय चीनी प्रति क्विंटल 2154 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर तक पहुंच गई थी। चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए चीनी पर स्टॉक लिमिट जारी करने के लिए सरकार जल्द नोटिफिकेशन जारी करेगी।
जिसमें तय किया जाएगा कि कारोबारी और चीनी मिलें अपने पास चीनी का अधिकतम कितना स्टॉक रख सकती हैं। इसके अलावा सरकार अतिरिक्त कोटा भी जारी करने वाली है जिससे चीनी की कीमतों को काबू में रखा जा सके।
चीनी का सबसे ज्यादा वायदा कारोबार करने वाले कमोडिटी एक्सचेंज नेशनल कमोडिटी ऐंड डेरिवेटिव एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) में चीनी वायदा का मार्च अनुबंध की कीमतें तीन फीसदी गिरकर 2123 रुपये प्रति क्विंटल के निचले स्तर पर, अप्रैल अनुबंध तीन फीसदी गिरकर 2162 रुपये प्रति क्विंटल और मई अनुबंध में 2.32 फीसदी की गिरकर 2236 रुपये प्रति क्विंटल होने पर चीनी के इस सभी अनुबंधों पर लोअर सर्किट लगा।
वायदा बाजार की तर्ज पर हाजिर बाजार में भी चीनी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली चीनी के थोक बाजार एपीएमसी में चीनी के दाम सुबह ही 150 रुपये प्रति क्विंटल गिरकर 1950 रुपये प्रतिक्विंटल पहुंच गई।
महाराष्ट्र शुगर फेडरेशन के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवरे कहते हैं कि उत्पादन कम होने की वजह मांग बढ़ती जा रही है और सप्लाई में कमी होती जा रही है, इसीलिए इसका असर चीनी की दामों पर पड़ना तय है। चीनी हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिंस रही है।
चुनाव नजदीक है इसीलिए सरकार को चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए कदम तो उठाने ही हैं। इंडियन शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन गुरनानी कहते हैं कि कीमतों को काबू में करना सरकार का काम है, सरकार चीनी के लिए अतिरिक्त कोटा जारी करती है तो बाजार और ग्राहक दोनों के लिए फायदेमंद होगा।
प्रकाश नाईकनवरे कहते हैं कि चीनी उत्पादन के प्रमुख राज्य महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन कम होने की वजह से इस बार चीनी की मिठास लोगों को तीखी लगनी तय थी, लेकिन चुनावी साल होने की वजह से सरकार ऐसा नहीं करने देगी।
सरकार अगर समय रहती सही कदम नहीं उठाएगी तो इस बार चीनी की कीमतों में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। गौरतलब है कि देश में इस बार करीबन 180 लाख टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है जबकि पिछले साल देश के अंदर कुल 263 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
बढ़ती कीमतों पर भारी पड़ी सरकार
सरकार ने चार महीने के लिए चीनी के भंडारण की सीमा तय करने का फैसला किया
गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि जमाखोरी पर अंकुश लगाने और दामों में बढ़ोतरी रोकने के लिए यह कदम उठाया गया
वायदा बाजार में चीनी की कीमत में मंगलवार को 3 प्रतिशत की गिरावट हुई और वायदा भाव में लगा लोअर सर्किट
पिछले 1 माह में 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़े चीनी के दाम