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हाइड्रोजन, सीएनजी, बायोगैस सहित वाहन ईंधन के कई रूप

Last Updated- December 14, 2022 | 11:35 PM IST

केंद्र सरकार की ओर से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के एक पखवाड़े बाद भी कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। तमाम प्याज उत्पादक इलाकों में बारिश की वजह से आपूर्ति प्रभावित हुई है और हाल के दिनों में कीमतों में तेजी आई है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग और एगमार्केट डॉट जीओवी डॉट इन से मिले आंकड़ों से पता चता है कि दिल्ली और मुंबई में प्याज के दाम 27 सितंबर को 50 रुपये किलो से ज्यादा थे, जबकि कोलकाता और चेन्नई में कीमत 40 रुपये किलो है। इसकी तुलना में 21 सितंबर को दिल्ली में खुदरा कीमत 41 रुपये किलो, मुंबई में 47 रुपये किलो, कोलकाता में 40 रुपये किलो और चेन्नई में 30 रुपये किलो थी।
आंकड़ों से ऐसा लगता है कि प्रतिबंध के बावजूद कोई असर नहीं है, लेकिन प्रतिबंध लगने के शुरुआती दिनों में ही थोक बाजार में कीमतें स्थिर हो गई थीं। बहरहाल 21 सितंबर के बाद से धारणा बदल गई है।
15 से 21 सितंबर के बीच दिल्ली के थोक बाजार में कीमतों में 3 रुपये प्रति किलो की मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि मुंबई में दाम 2 रुपये किलो बढ़े। कोलकाता में प्रतिबंध के बाद एक हफ्ते तक कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई और चेन्नई में भी मामूली बढ़ोतरी हुई।
कीमतों पर लगातार नजर रख रहे एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘हां, कीमतों में भारी कमी का अनुमान लगाया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। खासकर खुदरा बाजार में कारोबारियों ने यह लाभ निचले स्तर पर नहीं पहुंचाया क्योंकि उन्होंने पहले ज्यादा दाम पर खरीदे गए महंगे प्याज को निकाला है।’
उन्होंने कहा कि कीमतें कम न होने की एक वजह यह है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के प्याज उत्पादन करने वाले इलाकों में नए सिरे से भारी बारिश हुई है, जिससे प्याज की गुणवत्ता खराब हुई है। कारोबारी इसका लाभ उठा रहे हैं खुदरा बाजार में कीमतों में तेजी से कमी नहीं आ रही है। अधिकारी ने कहा, ‘कुछ इलाकों में बारिश की वजह से खेत से प्याज नहीं निकाला जा सका है। वहीं कुछ इलाकों में, जहां खेत से प्याज निकाला भी गया है, फसल की गुणवत्ता बहुत खराब है।’
उन्होंने कहा कि दिल्ली में स्थिति सामान्य होना मौसम की स्थिति पर निर्भर है। अलवर (राजस्थान) से आने वाले प्याज से दिल्ली में 25-30 प्रतिशत मांग पूरी होती है और वहां बंपर उत्पादन का अनुमान है और इस इलाके से अक्टूबर के अंत तक प्याज पहुंचना शुरू हो जाएगा।
केयर रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि कीमतें कम होने में वक्त लग रहा है क्योंकि बारिश की वजह से फसल खराब हुई है और आपूर्ति कम है। उन्होंने कहा, ‘जब भी प्याज की आपूर्ति कम होती है, सरकार निर्यात रोकती है। इसका असर होता है। अभी भी अगर निर्यात नहीं रोका गया होता तो आपूर्ति और कम होती और कीमतें और बढ़ सकती थीं।’

First Published - September 29, 2020 | 11:32 PM IST

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