MCX launch ‘Silver 100’ futures: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) ने निवेशकों के लिए चांदी में एंट्री को और आसान बना दिया है। सोमवार को लॉन्च किए गए ‘Silver 100’ फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए अब रिटेल निवेशक और छोटे ज्वैलर्स सिर्फ 100 ग्राम जैसी छोटी मात्रा में भी चांदी में निवेश कर सकेंगे। इससे अब तक बड़े संस्थागत निवेशकों के वर्चस्व वाले इस बाजार में पहुंच और ज्यादा आसान हो जाएगी।
ये नया कॉन्ट्रैक्ट MCX के मौजूदा सिल्वर फ्यूचर्स प्रोडक्ट्स के साथ जुड़ता है, जिनमें 30 किलोग्राम, 5 किलोग्राम और 1 किलोग्राम के कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं। साथ ही, 30 किलोग्राम और 5 किलोग्राम के मंथली ऑप्शंस भी उपलब्ध हैं। इनका क्लियरिंग और सेटलमेंट मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज क्लियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (MCXCCL) द्वारा किया जाएगा।
छोटे डिनॉमिनेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इससे छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) तथा रिटेल निवेशकों की पूंजी की आवश्यकता कम हो जाए। साथ ही, कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी पर पारदर्शी मेकिंग चार्ज के साथ गुणवत्ता-युक्त भौतिक (physical) डिलीवरी भी सुनिश्चित हो सके।
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MCX की एमडी एवं सीईओ प्रवीणा राय ने कहा, “Silver 100 फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट भारत के सिल्वर इंडस्ट्री में कारोबार करने वाले बिजनसों को कीमतों में उतार-चढ़ाव (price volatility) से बचाव में मदद करता है। अब स्थानीय ज्वैलरी कारोबार अपनी इन्वेंटरी जरूरतों के अनुसार बेहतर मेल खाने वाली मात्रा में हेजिंग कर सकते हैं या डिलीवरी ले सकते हैं। इससे उन्हें बड़े पैमाने पर पूंजी लगाने या अपनी वास्तविक व्यावसायिक जरूरतों से ज्यादा जोखिम लेने की आवश्यकता कम हो जाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट रिटेल निवेशकों को भी समय के साथ छोटी-छोटी मात्रा में चांदी में निवेश करने का अवसर देगा, वह भी एक सुरक्षित और रेगुलेटेड एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए।
ज्वैलर्स, SME (छोटे एवं मध्यम उद्यम) और रिटेल निवेशकों के लिए हेजिंग और निवेश में उपयोगी
लिक्विडिटी और छोटे डिनॉमिनेशन (मात्रा) के कारण बेहतर लचीलापन
यदि फ्यूचर्स की एक्सपायरी पर डिलीवरी ली जाती है, तो:
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MCX ने कहा कि यह कॉन्ट्रैक्ट उद्योग के प्रतिभागियों से मिले मार्केट फीडबैक के आधार पर तैयार किया गया है। एक्सचेंज ने सिल्वर के लिए अपने गुड डिलीवरी नॉर्म्स को संशोधित करते हुए एक अलग सर्कुलर भी जारी किया है, जिसमें घरेलू रिफाइनर्स को पैनल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह कदम भारत की चांदी के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।