प्रचंड गर्मी का दक्षिण पश्चिम मॉनसून पर सकारात्मक असर पडऩे की आम धारणा के उलट वैज्ञानिकों और मौसम विज्ञानियों का कहना है कि तेज लू और मॉनसून के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है खासकर तब जबकि सीजन में लू समय से पहले चलने लगे।
भारतीय मौमस विभाग ने पिछले हफ्ते जारी जारी किए गए एक आकलन में कहा कि देश भर में मार्च 2022 में औसत अधिकतम तापमान 33.10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि 122 वर्ष में सर्वाधिक है। इससे पहले का सर्वाधिक स्तर मार्च 2010 में 33.09 डिग्री सेल्सियस था।
मौसम पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट में उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘गर्मी के अगले चरण यानी कि मई और जून में जब देश के मध्य भाग में लू चलना समाप्त हो जाती है तब प्रशांत क्षेत्र से बहने वाली दक्षिण पश्चिमी हवाओं की गतिविधि में इजाफा होता है। इसके कारण मध्य भारत में मॉनसूनी बारिश के शुरुआती दौर पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन यदि लू समय से पहले चलने लगती है जैसा कि इस बार देखा जा रहा है तो इसका बहुत ज्यादा असर नहीं होता है।’
पलावत ने कहा कि इसके अलावा इस साल ला नीना जारी है और जून के आसपास यह विकसित चरण में प्रवेश कर सकता है जिसका मतलब यह भी है कि तटवर्ती प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान अभी भी ठंडा है।
पलावत ने कहा, ‘यदि लू का मौजूदा प्रारूप मई अंत तक या जून के आरंभ तक जारी रहता है और ला नीना के सामान्य रहने पर इन दोनों का दक्षिण पश्चिम मॉनसून पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।’
हालांकि, भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने लू के मौजूदा दौर और दक्षिण पश्चिम मॉनसून के शुरुआती प्रदर्शन के बीच किसी तरह के सकारात्मक संबंध होने से इनकार किया है।
बहरहाल, मौसम विभाग ने मार्च के अपने आकलन में यह भी पाया था कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मैदानी इलाकों वाले उत्तर पश्चिम भारत में औसत अधिकतम तापमान 30.73 डिग्री सेल्सियस के साथ सर्वाधिक स्तर पर रहा। इससे पहले औसत अधिकतम तापमान का सर्वाधिक स्तर 2004 में 30.67 डिग्री सेल्सियस रहा था।