देश के दूध उत्पादक दूध की खरीद की कीमत बढऩे से खुश हुए हैं, वहीं कंपनियों पर बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालने को लेकर दबाव बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों ने कहा कि यह कुछ असामान्य है, क्योंकि नवंबर से मार्च तक चलने वाले सीजन के दौरान दूध की कीमतों में नरमी आती है, जब आपूर्ति सामान्य से 8 से 10 प्रतिशत ज्यादा होती है।
बहरहाल कारोबार और बाजार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि इस बार इस सीजन में दूध की आपूर्ति पिछले साल की तुलना में करीब 20 से 25 प्रतिशत कम है, जिसकी वजह से खरीद की दरों पर असर पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप राज्य दुग्ध सहकारी समितियों और निजी कंपनियों ने या तो खुदरा दूध के दाम में बढ़ोतरी की है, या आने वाले सप्ताहों में ऐसा करने पर विचार कर रही हैं।
तेलंगाना में राज्य डेरी डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव ने दूध के दाम में 1 जनवरी से 2 से 4 रुपये लीटर बढ़ोतरी की घोषणा की है, जबकि कर्नाटक में भी राज्य सरकार कीमत बढ़ाने पर विचार कर रही है।
ग्राहक जितना दूध का दाम भुगतान करते हैं, उसमें से 80 प्रतिशत दूध उत्पादकों को खरीद मूल्य के रूप में दिया जाता है, जो कृषि उत्पादों में सबसे ज्यादा है। बाजार के सूत्रों ने कहा कि नवंबर के बाद से देश भर में गाय के दूध का खरीद मूल्य 29 से 30 रुपये प्रति लीटर है, जबकि यह पिछले साल की समान अवधि में 26 से 27 रुपये लीटर था। इसमें 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। वहीं भैंस के दूध का औसत मूल्य 41 से 42 रुपये लीटर है, जो पिछले साल करीब 39 रुपये लीटर था, इसकी कीमत में 5 से 8 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की कीमत 230 से 240 रुपये किलो है, जो आसानी से 260 रुपये किलो जा सकता है। लेकिन कोविड को लेकर अनिश्चितता के कारण आने वाले महीनों में कीमत पर लगाम रहने की संभावना है।
लैक्टालिस इंडिया के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘ज्यादा आपूर्ति वाले इस सीजन में दूध की आपूर्ति निश्चित रूप से पिछले साल से कम है। इसमें किसानों द्वारा जानवर पर कम निवेश, मई और जून में लॉकडाउन और चारे की कमी आदि जैसी वजहें शामिल हैं।’