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केरल तट पर 2-3 दिन में दस्तक दे सकता है मॉनसून

Last Updated- December 11, 2022 | 6:38 PM IST

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल तट पर दो से तीन दिन में दस्तक दे सकता है, लेकिन इसकी शुरुआत शायद उतनी जोरदार न हो, जितना पहले पूर्वानुमान जताया गया था। कुछ मौसम वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के साथ-साथ मौसम पूर्वानुमान बताने वाली एजेंसी स्काईमेट ने पूर्वानुमान जताया था कि मॉनसून 26 या 27 मई को मुख्य भूमि पर पहुंचेगा। ये दोनों पूर्वानुमान चार दिनों की घटत-बढ़त की त्रुटि प्रारूप वाले थे।
मौसम विभाग ने मौसम के अपने नवीनतम निर्देश में कहा है कि मौसम संबंधी ताजा संकेतों के अनुसार दक्षिण अरब सागर के निचले और गहरे हिस्से में पछुआ हवाएं तेज हो गई हैं। केरल तट और आस-पास के दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में बादल छाए हुए हैं। इसलिए अगले दो से तीन दिन के दौरान केरल में मॉनसून की शुरुआत के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं। इसके अलावा इसी अवधि के दौरान अरब सागर और लक्षद्वीप क्षेत्र के कुछ और हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढऩे के लिए परिस्थितियां भी अनुकूल हैं।
स्काईमेट वेदर में उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस बात पूरी संभावना है कि मॉनसून 1 जून से पहले केरल तट पर पहुंच जाएगा। लेकिन पलावत ने चेतावनी दी है कि इसकी शुरुआत शायद उतनी जोरदार न हो, जितनी पहले उम्मीद थी, क्योंकि दक्षिण-पश्चिमी हवा ने ज्यादा रफ्तार नहीं पकड़ी है।
पलावत ने कहा कि मॉनसून की शुरुआत के साथ भारी बारिश नहीं होगी तथा बारिश केरल और आंध्र प्रदेश की सीमा के भीतर रहेगी, जिसे कमजोर शुरुआत कहा जा सकता है।
मौसम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बारिश में देरी होने की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि हालांकि मॉनसून 27 मई को नहीं पहुंचा है, लेकिन यह अब भी चार दिनों की घटत-बढ़त की सीमा के भीतर है।
मौसम विभाग के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि हमारे लिए मॉनसून की शुरुआत में देरी नहीं हुई है, क्योंकि हमारे (मौमस विभाग) के मानकों के अनुसार अगर बारिश मानक विचलन सीमा के भीतर होती है, तो यह सामान्य शुरुआत मानी जाती है।
हालांकि मॉनसून की समय पर शुरुआत अच्छा संकेत होता है, लेकिन यह देश भर में जोरदार प्रगति की गारंटी नहीं होती है। अगर मध्य, उत्तर और पश्चिम भारत के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में समय पर बारिश होती है, तो इससे खरीफ फसलों की बुआई को बढ़वा मिल सकता है, जहां इस साल रकबा अच्छा रहने की संभावना है। इसकी वजह हाल ही में संपन्न हुई रबी कटाई में किसानों को मिलने वाला लाभकारी प्रतिफल है।
कृषि उत्पादन न केवल वर्षा की कुल मात्रा पर निर्भर करता है, बल्कि मॉनसून की समयबद्धता और भौगोलिक फैलाव पर भी निर्भर करता है। स्काईमेट पहले ही कह चुकी है कि मॉनसून वर्ष 2022 सीजन (जून और जुलाई) की पहली छमाही में दूसरी छमाही की तुलना में ज्यादा अच्छा रहने की उम्मीद है।

First Published - May 28, 2022 | 12:20 AM IST

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