facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

एमएसपी 452 रुपये क्विंटल तक बढ़ा

Last Updated- December 12, 2022 | 3:52 AM IST

केंद्र सरकार ने आज फसल सत्र (जुलाई से जून) 2021-22 के लिए खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पिछले साल के मुकाबले औसतन 3.7 फीसदी बढ़ा दिया। दलहन और तिलहन के एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है ताकि किसानों को धान के बजाय अन्य फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
खरीफ सीजन के दलहन और तिलहनों के एमएसपी में तुलनात्मक रूप से ज्यादा बढ़ोतरी ऐसे समय की गई है, जब दोनों ही जिंसों के दाम कम उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के कारण पिछले साल की तुलना में काफी ऊंचे बने हुए हैं।
अरहर और उड़द का एमएसपी 2021-22 के लिए 300 रुपये बढ़ाकर 6,300 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि मूंगफली का एमएसपी 275 रुपये बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। तिल का एमएसपी 452 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 7,307 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। मगर सामान्य किस्म के धान का एमएसपी केवल 72 रुपये बढ़ाकर 1,940 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। धान खरीफ सीजन में सबसे अधिक उगाया जाने वाला खाद्यान्न है।
अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) के पूर्व निदेशक (दक्षिण एशिया) प्रमोद कुमार जोशी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘किसानों को पानी की अधिक खपत वाले धान से हटाकर अधिक मांग वाले दलहन और तिलहन की तरफ लाने के लिए एमएसपी का इस्तेमाल अच्छी रणनीति है। मगर अनुभव यही कहता है कि बदलाव इतनी असानी से नहीं होता क्योंकि धान उगाने के लिए आवश्यक जलवायु दशाएं अरहर या उड़द उगाने के लिए आवश्यक जलवायु दशाओं से बिल्कुल अलग होती हैं।’
प्रमोद कुमार जोशी कहा कि धान देश के अधिक बारिश वाले क्षेत्रों या अच्छी सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है। अरहर तथा उड़द उन क्षेत्रों में उगाई जाती है, जहां बारिश कम होती है और कम सिंचाई होती है।
जोशी ने कहा, ‘मेरा मानना है कि एमएसपी उन इलाकों में किसानों को ज्यादा रकबे में अरहर एवं उड़द की बुआई करने को प्रोत्साहित कर सकता है, जहां इन फसलों की बुआई होती है। लेकिन इससे धान उत्पादक किसान ये फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित नहीं होंगे क्योंकि दोनों फसलों को उगाने के लिए एकदम अलग किस्म की जलवायु चाहिए।’ हालांकि केंद्र को ऐसा होने की उम्मीद है। इसीलिए उसने कहा कि फसलों के अलग-अलग एमएसपी का मकसद फसलों में विविधता को प्रोत्साहित करना है।
केंद्र ने आधिकारिक बयान में कहा कि अरहर, मूंग और उड़द का रकबा एवं उत्पादकता बढ़ाने की व्यापक योजना बनाई गई है।  बयान में कहा गया, ‘तिलहनों के मामले में एक विशेष खरीफ कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिससे तिलहन का रकबा 6.3 लाख हेक्टेयर बढ़ेगा। इससे 1.20 करोड़ टन अतिरिक्त तिलहन और 24.3 लाख टन खाद्य तेलों का उत्पादन होने की संभावना है।’
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि एमएसपी में बढ़ोतरी ने यह धारणा एक बार फिर खारिज कर दी है कि नए कृषि कानून से एमएसपी की व्यवस्था हो जाएगी।

First Published - June 9, 2021 | 11:06 PM IST

संबंधित पोस्ट