भारत जलवायु की दृष्टि से सबसे जोखिम वाले देशों में से एक बन गया है और हर साल प्राकृतिक आपदा (नैटकैट) से जुड़ी घटानाओं की बारंबारता और प्रचंडता बढ़ती जा रही है जिससे सूक्ष्म ऋणों के उधारकर्ताओं की पुनर्भुगतान क्षमताओं पर असर पड़ रहा है। ऐसे में सूक्ष्म वित्त संस्थाओं का नेटवर्क (एफआईएन) ऐसे उधारकर्ताओं को एक ऐसा बीमा उत्पाद देने पर विचार कर रहा है जो उन्हें इन आपदाओं से सुरक्षित करेगा।
एमएफआईएन ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के पास विनियामक सैंडबॉक्स के तहत प्रायोगिक परियोजना के लिए आवेदन किया है। अब उसे नियामक से परियोजना के संचालन की मंजूरी मिल गई है।
चोलामंडलम एम एस जनरल इंश्योरेंस प्रायोगिक परियोजना के तहत बीमा कवर मुहैया कराएगी।
एमएफआईएन के मुख्य कार्याधिकारी और निदेशक आलोक मिश्रा ने कहा, ‘प्रायोगिक परियोजना के तहत ओडिशा में तीन से चाल जिलों को कवर किया जाएगा।’