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प्राकृतिक रबर की कीमतें बढ़ीं

Last Updated- December 10, 2022 | 7:34 PM IST

प्राकृतिक रबर की कीमतों में थोड़ी सी तेजी आई है और अब यह 72 रुपये प्रति किलो हो गया है।
हालांकि इस महीने की 2 तारीख को रबर 70 रुपये प्रति किलो पर था और टर्मिनल बाजारों में कमजोर आपूर्ति के चलते इसकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
इस समय रबर का उत्पादन भी कम हो रहा है, क्योंकि गरमी की वजह से ज्यादातर बागानों में रबर निकालने का काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। उत्पादकों के मुताबिक दिन के समय में तापमान जब 40 डिग्री सेल्सियस हो जाता है तब रबर निकालना काफी कठिन हो जाता है।
केरल में बारिश न होने की वजह से स्थिति और जटिल हो गई है। बाजार में इस समय कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और इसकी वजह आपूर्ति का कम होना है, इसे देखते हुए उत्पादक भविष्य में भी आपूर्ति में कमी कर सकते हैं।
इस समय पूरे केरल में किसान बारिश की प्रतीक्षा में हैं, क्योंकि बारिश न होने से मसालों की सभी फसलें, नारियल और प्राकृतिक रबर प्रभावित हो रहे हैं। उत्पादकों का कहना है कि एक बात अगर फसलों को बारिश का पानी मिल जाता है तो उत्पादन में सुधार होगा।
अनुमान के मुताबिक फरवरी और मार्च महीने में रबर का उत्पादन 50,000-55,000 टन के बीच होता है। कारोबारियों के मुताबिक भले ही अस्थायी रूप से आपूर्ति की कमी है, लेकिन टायर कंपनियों में मांग न होने की वजह से कुल मांग भी बहुत कमजोर है।
इसे देखते हुए रबर का बाजार 72-73 रुपये प्रति किलो पर बहुत कम समय के लिए रहेगा। इस समय दुनिया भर में रबर की मांग में भारी कमी आई है, जिसकी वजह से स्वाभाविक रूप से उत्पादन में कमी आई है।
रबर की वैश्विक खपत के हालिया अनुमानों के मुताबिक प्राकृतिक रबर की खपत पिछले साल की तुलना में 2008-09 में 6 प्रतिशत कम रहेगी। लेकिन अनुमान लगाया गया है कि उत्पादन में केवल 1-1.5 प्रतिशत की कमी आएगी। 2007-08 में रबर का कुल वैश्विक उत्पादन 97,25,000 टन था जबकि खपत 97,19,000 टन रहा।
पिछले वित्तीय वर्ष में उत्पादन और खपत दोनों में बढ़ोतरी हुई। लेकिन इस साल रबर की खपत में 5.5 लाख टन की कमी आने का अनुमान है। इसकी वजह से 450,000 -500,000 टन का अतिरिक्त भंडार जमा हो जाएगा।
हालांकि वैश्विक मंदी के चलते स्थिति खराब है, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि खपत में कमी आएगी। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि रबर की कीमतों में गिरावट पेट्रोल की कीमतों में गिरावट जैसी बिल्कुल नहीं होगी।

First Published - March 12, 2009 | 12:05 PM IST

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