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महंगे तेल ने बिगाड़ा आम आदमी के रसोई का बजट, लेकिन सरसों-सोयाबीन के दाम बढ़ने से किसान मालामाल

पश्चिम एशिया संकट और कमजोर रुपये से खाद्य तेल भले ही महंगे हुए हों, लेकिन सरसों-सोयाबीन के दाम एमएसपी से ऊपर जाने से तिलहन किसान मालामाल हो रहे हैं

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- May 24, 2026 | 9:13 PM IST

पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में खाना पकाना महंगा हो गया है क्योंकि खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी आई है। इससे भले ही उपभोक्ताओं का बजट बिगड़ रहा हो, लेकिन किसानों के अच्छे दिन आ गए हैं क्योंकि तिलहन फसलों की कीमतों में तेजी आई है। बाजार के जानकारों के मुताबिक घरेलू खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि की वजह कमजोर रुपया और विदेशी बाजार में खाद्य तेल महंगा होने के साथ-साथ रिफाइंड तेल और कच्चे सोयाबीन तेल के आयात में कमी आना है। हालांकि कुल खाद्य तेलों का आयात बढ़ा भी है।

कितने महंगे हुए खाद्य तेल?

पश्चिम एशिया संकट के बाद से खाद्य तेलों के दाम 10 से 15 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। इस समय सरसों तेल के थोक भाव 150 से 155 रुपये, रिफाइंड सोयाबीन तेल के दाम 150 से 152 रुपये, मूंगफली तेल के 175 से 180 रुपये, सूरजमुखी के 160 से 165 रुपये प्रति किलो हैं। सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री ऐंड ट्रेड के चेयरमैन सुरेश नागपाल ने बताया कि खाद्य तेलों की आपूर्ति को लेकर फिलहाल बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन कच्चा तेल महंगा होने और युद्ध के हालात के कारण विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों के दाम चढ़े हैं। इसके साथ ही बीते कुछ महीनों से रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होने से खाद्य तेलों का आयात महंगा हुआ।

इसका असर आयातित और देसी तेलों की कीमतों पर वृद्धि के रूप में देखने को मिला है। कमोडिटी एक्सपर्ट और एग्रोकॉर्प इंटरनैशनल में रिसर्च हेड इंद्रजीत पॉल कहते हैं कि कुल खाद्य तेल आयात भले ज्यादा हो रहा हो, लेकिन रिफाइंड पाम तेल और कच्चे सोयाबीन तेल के आयात में कमी से खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी को बल मिला है।

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तिलहनों की कीमतों में तेजी से किसानों को हो रहा ज्यादा फायदा

पश्चिम एशिया संकट से उपभोक्ताओं की रसोई का बजट भले बढ़ गया हो, लेकिन इससे तिलहन किसानों को फायदा हो रहा है क्योंकि सरसों व सोयाबीन जैसी प्रमुख घरेलू तिलहन फसल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। जयपुर के सरसों कारोबारी अनिल चतर ने बताया कि विदेशों में खाद्य तेल महंगे होने का असर घरेलू बाजार में सरसों के भाव पर पड़ा है। सरसों के भाव 20 फीसदी बढ़कर 7,200 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। इस सरसों की पेराई भी खूब हो रही है। इस साल मई के आखिर तक 50 लाख टन सरसों की पेराई होने का अनुमान है, जो पिछले साल की इस अवधि से 20 फीसदी ज्यादा है।

पॉल ने कहा कि सोयाबीन की कीमतों में तेजी आई है। सोयाबीन के दाम 30 फीसदी बढ़कर 7,500 से 7,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। सोयाबीन महंगी होने की वजह विदेशी हालात के साथ इस साल इसका उत्पादन कम होना भी है। मूंगफली भी पिछले साल से 35 फीसदी महंगी बिक रही है। तिलहन के दाम बढ़ने से किसानों की आय बढ़ गई है। दोनों प्रमुख तिलहन न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊपर बिक रही है। सोयाबीन का एमएसपी 5,708 रुपये क्विंटल है, जबकि इस समय भाव इससे करीब 2,000 रुपये तक ज्यादा हैं। इसी तरह सरसों का एमएसपी 6,200 रुपये क्विंटल हैं, जबकि अभी भाव इससे 1,500 रुपये तक अधिक हैं।

रिफाइंड पाम तेल का आयात घटा

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक तेल वर्ष 2025-26 (नवंबर से अक्टूबर) की नवंबर-अप्रैल अवधि में  79.37 लाख टन वनस्पति तेलों (78.15 लाख टन खाद्य तेल और करीब 1.21 लाख टन गैर खाद्य तेल) का आयात हुआ है, जो पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में 70.42 लाख टन वनस्पति तेलों (68.76 लाख टन खाद्य तेल और 1.66 लाख टन गैर खाद्य तेल) के आयात से 13 फीसदी ज्यादा है। अप्रैल में सालाना आधार पर इन तेलों के आयात में 34 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई।

लेकिन देश में रिफाइंड पाम तेल के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चालू तेल वर्ष की नवंबर-अप्रैल अवधि में महज 2.48 लाख टन रिफाइंड तेलों का आयात हुआ, जबकि पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 11.11 लाख टन था। कच्चे सोयाबीन तेल के आयात में भी कमी आई है। इस तेल वर्ष अप्रैल तक 22.91 लाख टन कच्चे सोयाबीन तेल का आयात हुआ, जो पिछले तेल वर्ष की इसी अवधि के आयात 26 लाख टन से कम है।

First Published : May 24, 2026 | 9:07 PM IST