Onion Export Boom: महाराष्ट्र की सियासत में प्याज की कीमतों को लेकर भले ही बवाल मचा हो लेकिन निर्यात के आंकड़े प्याज उत्पादकों के लिए उत्साहजनक देखने को मिल रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा प्याज निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देने के बाद, वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के प्याज निर्यात में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र का प्याज निर्यात पिछले वर्ष के लगभग पांच लाख टन से दोगुना होकर अब 10.59 लाख टन के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडी) के आंकड़ों के मुताबिक भारत से वित्त वर्ष 2025-26 में 15.48 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ जबकि 2024-25 में 11.48 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था। भारत के कुल प्याज निर्यात में महाराष्ट्र का वर्चस्व कायम है। आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल प्याज निर्यात में अकेले महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 68 प्रतिशत है। राज्य के भीतर भी नासिक जिला निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जिसका योगदान 80 से 90 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है।
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निर्यात में इस भारी उछाल का मुख्य श्रेय केंद्र सरकार के उन फैसलों को जाता है, जिसमें निर्यात शुल्क में कटौती की गई और न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) की शर्त को हटा लिया गया। 2024-25 में केंद्र सरकार ने एमईपी पर कई सख्त पाबंदियां लगाई थीं। इनमें 550 डॉलर प्रति टन की एमईपी और 40 फीसदी की भारी निर्यात शुल्क शामिल था। 13 सितंबर, 2024 को सरकार ने MEP दी और निर्यात शुल्क 40 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी कर दिया। इन नीतिगत बदलावों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की मांग में भारी तेजी आई है।
निर्यात वृद्धि का सबसे ज्यादा फायदा महाराष्ट्र को हुआ। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र से कुल 10,59,935.30 मीट्रिक टन प्याज का निर्यात हुआ जिसका मूल्य 2,406.87 करोड़ रुपये (272.70 मिलियन डॉलर) प्राप्त हुआ, जबकि इसके पिछले साल यानी 2024-25 में राज्य से कुल 4,98,245.91 मीट्रिक टन प्याज का निर्यात हुआ था जिससे 1436.40 करोड़ रुपये ( 170.00 मिलियन डॉलर ) प्राप्त हुए थे।
राज्य के मंत्री दादा भुसे ने नासिक में विश्वास जताते हुए कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्वीकार किया कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण प्याज की कीमतों में आई गिरावट से किसानों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इस स्थिति से निपटने के लिए, सरकार ने नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) के माध्यम से सीधे किसानों से प्याज खरीदने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई हालिया बैठक के बाद यह उम्मीद जागी है कि इस सीधी खरीद से किसानों को उनकी उपज का बेहतर और लाभकारी मूल्य मिल सकेगा। किसानों की तरफ से आ रही शिकायतों को देखते हुए प्याज के ए ग्रेड में भी बदलाव किया गया है।
महाराष्ट्र के साथ देश के भी प्याज निर्यात में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 के 11,47,722 मीट्रिक टन की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज का निर्यात बढ़कर 15,47,940 मीट्रिक टन हो गया। हालांकि निर्यात मूल्य में कमी हुई हुई। वित्त वर्ष 2025-26 में 397.26 मिलियन डॉलर की प्याज का निर्यात हुआ जबकि 2024-25 में देश से निर्यात होने वाले प्याज का मूल्य 453.95 मिलियन डॉलर मिला था। इसकी वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्याज की कीमतें कम होना बताया जा रहा है।
सरकार की निर्यात नीति में बार-बार बदलाव का असर निर्यात बाजार पर साफ देखने को मिल रहा है। एक समय में भारतीय प्याज का बड़ा खरीदार रहा बांग्लादेश, अब अपनी हिस्सेदारी में भारी गिरावट देख रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जहां बांग्लादेश की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत थी, वह अब घटकर मात्र 6 प्रतिशत रह गई है। यह बदलाव अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय प्याज की बढ़ती पैठ को दर्शाता है।