केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि देश में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल इस साल दिसंबर या जनवरी में उपलब्ध हो सकता है। हालांकि इसके लिए लक्ष्य 2023 का रखा गया था। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हम एथनॉल उत्पादन की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और मेरा मानना है कि 20 प्रतिशत मिश्रण वाला ईंधन अप्रैल, 2023 (के लक्ष्य) से पहले दिसंबर या जनवरी में बाजार में आ जाएगा।’
ब्राजील जहां फ्लेक्स ईंधन वाले वाहन उपलब्ध हैं और उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार एथनॉल या पेट्रोल ले सकते हैं, का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यही सरकार का अंतिम लक्ष्य होगा। हालांकि उस स्तर तक पहुंचने के लिए कुछ तकनीकी पहलू हैं और काम चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम एथनॉल मिश्रण को लेकर वाहन विनिर्माता कंपनियों के साथ एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं।’ मंत्री ने कहा कि पेट्रोल में एथनॉल-मिश्रण प्रतिशत 2013 में 0.67 प्रतिशत से बढ़कर मई, 2022 में 10 प्रतिशत हो गया है यानी निर्धारित समय से पांच महीने पहले। यह 27 लाख टन CO₂ उत्सर्जन को कम कर रहा है जो पर्यावरण के लिए अच्छा है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुमानों के अनुसार भारत आने वाले दो दशकों में वैश्विक ऊर्जा खपत में वृद्धि का एक-चौथाई (25%) योगदान देगा। बीपी का अनुमान है कि भारत की ऊर्जा मांग दोगुनी हो जाएगी, जबकि प्राकृतिक गैस की मांग 2050 तक पांच गुना बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में पाइपलाइन का कार्य तेज गति से हो रहा है। 2014 तक गैस पाइपलाइन 14,000 किलोमीटर तक थी, जो आज 22,000 किलोमीटर से अधिक तक पहुंची है। इसे 35,500 किलोमीटर तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने विकासशील अर्थव्यवस्था को कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों से बचाते हुए वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों का अच्छी तरह से सामना किया है।
भारतीय पेट्रोलियम उद्योग अवसर के शिखर पर है और 2030 तक अपनी कच्चे तेल की मांग का 25 प्रतिशत उत्पादन करने में सक्षम होगा। वर्तमान में हमारे देश में हर दिन 50 लाख बैरल पेट्रोलियम की खपत हो रही है और इसमें भी तीन प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि वैश्विक औसत लगभग एक प्रतिशत से अधिक है। पुरी ने यहां तीन दिन की पांचवी साउथ एशियन जियोसाइंस कॉन्फ्रेंस जियो इंडिया 2022 का उद्घाटन किया।