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पीएमओ ने की बिजली की उपलब्धता की समीक्षा

Last Updated- December 12, 2022 | 12:18 AM IST

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने आज कोयला आपूर्ति और विद्युत उत्पादन की स्थिति की समीक्षा की। यह समीक्षा इस संदर्भ में की गई है कि सरकार विभिन्न राज्यों में उत्पन्न हुई बिजली संकट को समाप्त करने के लिए उपायों पर विचार कर रही है। कोयले की आपूर्ति में कमी से कई राज्यों में अंधेरा छाने की नौबत आ गई है। सूत्रों ने बताया कि बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी पर हुई बैठक में ऊर्जा सचिव आलोक कुमार और कोयला सचिव ए के जैन ने कोयला और बिजली की उपलब्धता पर एक प्रस्तुति दी। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कोयले के परिवहन को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई थी। सूत्रों ने कहा कि कोयला मंत्रालय को जहां कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कहा गया है, वहीं रेलवे से कहा गया है कि वह बिजली संयंत्रों तक ईंधन के परिवहन के लिए रैकों की उपलब्धता बना कर रखे।
देश के बिजली मिश्रण में कोयला से तैयार होने वाली बिजली की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी है। ऐसे में कोयला की कमी पड़ते ही राजस्थान से लेकर केरल तक विभिन्न राज्यों में बारी बारी से बिजली कटौती का दौर आरंभ हो गया है। करीब दो तिहाई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में एक हफ्ते या उससे कम दिनों के लिए कोयले का भंडार बचा है लेकिन कोयला मंत्रालय ने कहा, ‘विद्युत आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा पडऩे का भय पूरी तरह से भ्रामक है।’ राज्यों को मांग पूरी करने के लिए महंगी दरों पर एक्सचेंजों से बिजली खरीदनी पड़ रही है।
संकट को टालने के लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने कई तरह के निर्देश जारी किए हैं। इसमें राज्यों को एक्सचेंजो पर उच्च कीमत पर बिजली नहीं बेचने के लिए कहने से लेकर राज्य विद्युत उत्पादकों से समुचित आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश तक शामिल है। सरकारी क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) से कहा गया है कि वह इस हफ्ते रोजना बिजली उत्पादकों को की जाने वाली कोयला आपूर्ति को बढ़ाकर 15.5-16 लाख टन पर ले जाए और 20 अक्टूबर के बाद से आपूर्ति रोजाना 17 लाख टन पर पहुंचाए।

First Published - October 12, 2021 | 11:20 PM IST

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