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छत पर सौर संयंत्र लगाने में परिवारों की मदद के लिए आएगा पोर्टल

Last Updated- December 11, 2022 | 9:26 PM IST

अपनी छत पर सौर बिजली संयंत्र लगाने के इच्छुक ग्राहक अब अपने इलाके में संयंत्र के आपूर्तिकर्ता, इसे लगाने में मदद करने वालों और संबंधित बिजली इकाइयों से सब्सिडी के बारे में आसानी से जानकारी हासिल कर सकेंगे और इसके लिए पंजीकरण करा सकेंगे। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) इस तरह की जानकारी मुहैया कराने के लिए एक राष्ट्रीय पोर्टल विकसित कर रहा है।
आवासीय ग्राहकों के लिए यह पोर्टल एकल समाधान केंद्र होगा, जहां वे सौर संयंत्र लगाने के लिए पंजीकरण से लेकर उसे लगवाने या छत पर सौर बिजली व्यवस्था (आरटीएस) लगवाने के लिए वेंडर बुलाने की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। बुधवार को एमएनआरई ने एक नोटिस में इसकी पूरी प्रक्रिया सूचीबद्ध की है और यह पोर्टल अगले 6 से 8 महीनों में परिचालन में आ जाएगा।
एमएनआरई के ज्ञापन के मुताबिक नैशनल पोर्टल पर आरटीएल के लिए पंजीकरण कराया जा सकेगा और सभी जरूरी मंजूरियां ली जा सकेंगी। राज्यों में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के स्तर पर इसी प्रारूप में एक पोर्टल बनाया जाएगा।
ज्ञापन में कहा गया है, ‘लाभार्थी परिवार, जो आरटीएस स्थापति कराने को इच्छुक है, अपने बैंक खाते के ब्योरे सहित राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन करेगा, जहां आरटीएस लगाने के लिए सब्सिडी भेजी जाएगी।’ यह आवेदन संबंधित डिस्कॉम को भेज दिया जाएगा, जो तकनीकी व्यवहार्यता मंजूरी देगी।
इस समय केंद्र सरकार 3 किलोवाट तक क्षमता वाले आरटीएस की लागत पर 40 प्रतिशत सब्सिडी मुहैया कराती है, जबकि 3 किलोवाट से उपर और 10 किलोवाट क्षमता तक के संयंत्र पर 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। नोटिस में कहा गया है कि यह सब्सिडी डिस्कॉम द्वारा सीधे आरटीएस आवेदक के बैंक खाते में दी जाएगी।
कुछ राज्यों ने भी आरसीएस लगाने पर सब्सिडी की पेशकश की है, लेकिन अब पोर्टल के माध्यम से इसका विस्तृत ब्योरा होगा और केंद्र की ओर से मिलने वाली सब्सिडी का पूरा खाका मिल सकेगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत ने इस दशक के अंत तक 500 गीगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन की प्रतिबद्धता जताई है। इस समय क्षमता 40 गीगावॉट है। साथ ही केंद्र सरकार ने 40 गीगावॉट रूफटॉप सौर क्षमता स्थापित करने की योजना बनाई है, जिससे इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक पूरा किया जाना है।
ग्रिड से जुड़ी बड़े पैमाने पर सौर बिजली उत्पादन परियोजनाओं की तुलना में रूफटॉप सौर क्षेत्र की वृद्धि की रफ्तार सुस्त रही है। छत पर सौर बिजली उत्पादन की देश में क्षमता इस समय 5 गीगावॉट के करीब है। 2021-22 के दौरान रूफटॉप सौर क्षमता करीब 1.2 गीगावॉट जोड़ा गया। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक छत पर सौर संयंत्र में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी वाणिज्यिक और औद्योगिक (सीऐंडआई) क्षेत्र की है। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा कि अन्य सेग्मेंट में आवासीय और सार्वजनिक क्षेत्र हैं, जिसमें बहुत वृद्धि दर्ज नहीं हुई है, क्योंकि इसे लेकर जागरूकता का अभाव रहा है।  
एमएनआरई ने नोटिस में कहा है कि पोर्टल पर सरकार द्वारा मान्यता प्रात्पद आरटीएस सर्विस और सिस्टम प्रदाताओं की सूची होगी। नोटिस में कहा गया है, ‘इस काम के लिए चुने गए वेंडरों की सूची पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। आरटीएस संयंत्र के लिए एमएनआरई मानक और विशेषताएं भी जारी करेगा और लाभार्थी व वेंडर के बीच समझौते का प्रारूप भी होगा, जिससे प्रदर्शन मानक व सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।’
आरटीएस लाभार्थी को संबंधित डिस्कॉम के पास नेट मीटरिंग के लिए भी आवेदन करना होगा। नेट मीटर या तो डिस्कॉम द्वारा या लाभार्थी द्वारा डिस्कॉम की मदद से स्थापित किया जाएगा।  नेट मीटरिंग से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि अगर आरटीएस सिस्टम मालिक अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली का उत्पादन करता है तो अतिरिक्त उत्पादन वह पॉवर ग्रिड को दे सकेगा और डिस्कॉम को उसे बेच सकेगा। बिक्री की राशि डिस्कॉम द्वारा उस परिवार को जारी किए गए बिजली बिल में समायोजित कर दी जाएगी।

First Published - February 3, 2022 | 11:09 PM IST

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