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पशुओं के चारे पर जीएसटी स्पष्टीकरण से विवाद संभव

Last Updated- December 12, 2022 | 12:26 AM IST

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किए गए स्पष्टीकरण के बाद शराब उद्योग अवशिष्ट उत्पादों से बने पशुओं के चारे, खनिज अधिकार, यूपीएस इनवर्टर व एक्सटर्नल बैटरी पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों को लेकर विवाद हो सकता है।

राजस्व विभाग के तहत आने वाले कर शोध इकाई (टीआरयू) की ओर से बुधवार को जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि शराब उद्योग द्वारा इस्तेमाल होने वाले गन्ने और मक्के, मोलैसिस से बनने वाले ड्रायड डिस्टिलर्स ग्रेन विद सॉल्यूबल (डीडीजीएस) पर 5 प्रतिशत की दर से कर लगेगा। यह स्पष्टीकरण जीएसटी परिषद की लखनऊ में हुई बैठक के मुताबिक जारी किया गया है।

एएमआरजी ऐंड एसोसिएट्स में सीनियर पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि शराब उद्योग जो अवशिष्ट निकालता है, उसमें बहुत बड़ी मात्रा में पानी होता है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस कचरे को नदी में छोडऩे पर रोक लगा दी है। इन निर्देशों का पालन करने के लिए शराब कंपनियों ने कचरे का निपटान शुरू किया और इसे डीडीजीएस में बदला, जिसे जानवरों के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।  मोहन ने हा कि अन्य अवशिष्ट पर कर लगता है, जबकि जानवरों का चारा अलग श्रेणी में आता है और उस पर कोई कर नहीं लगता है। उन्होंने कहा, ‘डीडीजीएस को कचरे के रूप में देखना गलत है।’

इसके अलावा अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यूपीएस इनवर्टर पर 18 प्रतिशत और एक्सटर्नल बैटरी पर 28 प्रतिशत कर होगा।

ईवाई में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, ‘उद्योग आगे और स्पष्टीकरण चाहेगा क्योंकि इसकी अलग कीमत नहींं होती और दोनों वस्तुओं का एक ही मूल्य होता है।’

टीआरयू में यह भी स्पष्ट किया गया है कि खनिजों के अन्वेषण पर राज्य सरकारोंं की रायल्टी पर 1 जुलाई, 2017 से 31 दिसंबर, 2018 तक 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। वहीं 1 जनवरी, 2019 से दरों में पहले ही संशोधन कर दिया गया है और इसे 18 प्रतिशत कर के दायरे में रखा गया है। रस्तोगी ने कहा कि यह स्पष्टीकरण न्यायिक जांच के दायरे मेंं होगा। उन्होंने कहा, ‘मुख्य मसला यह बना हुुआ है कि अगर कोई वैधानिक भुगतान है, तो क्या वह कर के दायरे में आएगा।’ 

First Published - October 7, 2021 | 11:41 PM IST

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