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कोयले की किल्लत से राज्यों में बिजली कटौती

Last Updated- December 12, 2022 | 12:23 AM IST

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण और लोगों से बातचीत के आधार पर पता चला है कि कोयले की कमी के कारण उत्तर भारत के राज्यों को बिजली कटौती की मार झेलनी पड़ी है और उन्हें आगे भी इसका
सामना करना होगा। यह स्थिति सरकार के उस दावे के उलट है जिसमें उसने पर्याप्त बिजली होने का भरोसा दिया है।
भारत चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उपभोक्ता देश है और यहां भी चीन के बाद अब बड़े पैमाने पर बिजली कटौती की स्थिति बनने लगी है। चीन में इस संकट के प्रबंधन के लिए फैक्टरियों और स्कूलों तक को बंद तक करने की नौबत आ गई।
भारत में करीब 70 फीसदी बिजली आपूर्ति के लिए जिम्मेदार 135 कोयला संचालित विद्युत संयंत्रों में तीन से कम का ईंधन भंडार बचा है। यहा जानकारी राष्ट्रीय ग्रिड संचालक से प्राप्त हुई है। ऊर्जा मंत्रालय ने इस संबंध में टिप्पणी करने के लिए अनुरोध किए जाने पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।
बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस समाचारपत्र ने ऊर्जा मंत्री आर के सिंह के हवाले से कहा, ‘देश में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां पर मांग के मुताबिक हम बिजली की अपूर्ति करने में सक्षम नहीं हों।’
राष्ट्रीय ग्रिड नियामक पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉर्पोरेशन से दैनिक लोड आपूर्ति को लेकर रॉयटर्स के विश्लेषण से पता चलता है कि अक्टूबर के पहले सात दिनों में भारत की बिजली आपूर्ति में हुई कटौती पूरे साल में हुई कटौती का 11.2 फीसदी के स्तर पर पहुंच चुकी है। डेटा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है लेकिन विश्लेषण से समस्या के पैमाने को लेकर एक ठोस संकेत मिलता है। कीमत चढऩे और महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के बाद उपभोग में सुधार होने से मांग और आपूर्ति शृंखला पर दबाव बढऩे के कारण दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव आ गया है। अक्टूबर महीने के पहले सात दिनों में देश में हुई बिजली की कटौती पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 21 गुना अधिक थी और 2019 की समान अवधि के मुकाबले चार गुना अधिक थी।
दैनिक लोड आपूर्ति आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि बिहार और झारखंड तथा उत्तर पश्चिम राज्य राजस्थान इस समय बिजली कटौती से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

First Published - October 8, 2021 | 11:39 PM IST

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