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सुस्त माॅनसून से दलहन के दामों में तेजी

Last Updated- December 11, 2022 | 5:56 PM IST

करीब 3 महीने की सुस्ती के बाद एक बार फिर दलहन के दाम में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के दलहन उत्पादन वाले इलाकों में दक्षिण पश्चिम मॉनसून में देरी को इसकी वजह माना जा रहा है।
व्यापार और बाजार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि पिछले सप्ताह और मंगलवार के बीच देश के प्रमुख थोक बाजारों में अरहर की दाल 5 प्रतिशत महंगी हुई है। वहीं उड़द की कीमतों में करीब 3 से 4 प्रतिशत तेजी आई है। बारिश कम होने और खरीफ की फसल पर इसके असर की चिंता ने कीमतें बढ़ा दी हैं।
 आंकड़ों से पता चलता है कि देश भर में 24 जून तक दलहन का रकबा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 36 प्रतिशत कम है। वहीं अरहर की बुआई का रकबा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 55 प्रतिशत कम है।  वहीं उड़द का रकबा 52 प्रतिशत कम है।
आल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के सुरेश अग्रवाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड से फोन पर इंदौर से बातचीत में कहा,  ‘महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में मॉनसून आने के साथ जून महीने में व्यापक पैमाने पर अरहर और उड़द की बुआई हो जाती है। लेकिन इस बार बुआई में देरी हो रही है। पहले 10 जून को मॉनसून आने की उम्मीद की गई थी, उसके बाद 15 जून को आने की उम्मीद की गई। अब 28 जून भी पार कर गया और बारिश में कोई तेजी नहीं आई है। इसकी वजह से दलहन की कीमतों में तेजी आ रही है।’
अग्रवाल ने कहा कि अगर जल्द बारिश शुरू हो जाती है तो बाजार स्थिर हो जाएगा क्योंकि तब फसल तैयार होने में देरी की आशंका खत्म हो जाएगी। चेन्नई में एफएक्यू उड़द की कीमत शनिवार को 7,250 से 7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई, जो मंगलवार की सुबह 7,425 रुपये क्विंटल पहुंच गई। आयातित उड़द की कीमत भी शनिवार से करीब 15 डॉलर बढ़कर 940 से 1040 डॉलर प्रति टन के भाव बिकी। चेन्नई के बाजार में अरहर की कीमत पिछले सप्ताह 6,300 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो मंगलवार को बढ़कर 6,325 से 6,450 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है।
इस समय चेन्नई के बाजारों में अच्छी आवक हो रही है, जिसकी वजह से बाजार सूत्र उसे मानक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। अन्य दलहन में मसूर और मूंग की कीमत भी बढ़ी है, जबकि चने की कीमत में इस अवधि के दौरान मामूली कमी आई है। आईग्रेन इंडिया के कमोडिटी एनॉलिस्ट राहुल चौहान ने कहा, ‘अप्रैल से जून सामान्यतया दलहन की मांग के हिसाब से कमजोर महीने होते हैं क्योंकि ग्राहकों के पास अन्य विकल्प उपलब्ध होते हैं। कीमतों में यह बढ़ोतरी कमजोर मॉनसून की वजह से है।’
उन्होंने कहा कि अगर मॉनसून में संतोषजनक प्रगति नहीं होती है तो अगले 3-4 दिन कीमत बढ़ी हुई रह सकती है और दीवाली के बाद यह एमएसपी से ऊपर पहुंच सकती है।

सुस्त बारिश
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के हाल के आंकड़ों के मुताबिक 28 जून तक देश भर में बारिश सामान्य से 10 प्रतिशत कम रही है। इसमें भी दलहन उत्पादक इलाकों मध्य एवं उत्तर पश्चिम भारत में कुल बारिश सामान्य से 31 प्रतिशत और 19 प्रतिशत कम रही है। सोमवार तक के आंकड़ों के मुताबिक 9 राज्यों  व एक केंद्र शासित प्रदेश में दक्षिण पश्चिमी मॉनसून पहुंच चुका है और वहां सामान्य से कम
बारिश हुई है।

उम्मीद बरकरार
मौसम विभाग का कहना है कि स्थिति पक्ष में है और अगले 24 घंटों के दौरान बिहार के शेष इलाकों, उत्तर प्रदेश के कुछ और इलाकों, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। विभाग ने कहा है कि स्थितियां लगातार पक्ष में रहेंगी और अरब सागर और गुजरात के शेष इलाकों, राजस्थान के कुछ इलाकों, मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के शेष इलाकों, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अगले 48 खंडे में 30 जून से 1 जुलाई तक बारिश हो सकती है।
बहरहाल मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने एक शोध नोट में कहा है कि कैलेंडर वर्ष 2020 में माहवार बारिश के आंकड़ों के मुताबिक कुल बारिश की सिर्फ 19 प्रतिशत जून में बारिश हुई। जुलाई में करीब एक तिहाई बारिश हुई, जबकि अगस्त में 29 प्रतिशत बारिश हुई। 2021 में जून में 21 प्रतिशत, जुलाई में 30 प्रतिशत और अगस्त में 22 प्रतिशत बारिश हुई।

First Published - June 29, 2022 | 1:09 AM IST

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