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सस्ते भारतीय गेहूं की होगी गुणवत्ता जांच

Last Updated- December 11, 2022 | 7:42 PM IST

गेहूं के शीर्ष आयातक मिस्र को भारत सस्ते गेहूं की पेशकश कर सकता है, लेकिन उसे मिस्र के कृषि मंत्रालय द्वारा तय गुणवत्ता मानकों से गुजरने के साथ महंगी ढुलाई की समस्या से जूझना पड़ सकता है।
पिछले सप्ताह मिस्र के कृषि मंत्रालय ने घोषणा की थी कि उसने भारत से गेहूं के आयात को मंजूरी दी है, लेकिन उसमें कुछ शर्तें रखी गई हैं। रॉयटर्स ने दस्तावेज देखे हैं, जिसके मुताबिक शर्तों में निर्यात के पहले कीटों की जांच और सिर्फ एक खास कीटनाशक का इस्तेमाल किया जाना शामिल है।
विभाग के प्रमुख अहम अल अतर ने रॉयटर्स से कहा, ‘हमने गेहूं आयात को मंजूरी दी है, इसका मतलब यह नहीं कि हम कुछ भी स्वीकारकर लेंगे। इसमें प्लांट क्वारंटीन विभाग द्वारा तय तकनीकी शर्तें रखी गई हैं।’
गुणवत्ता की चिंता फंगल बीमारी करनाल बंट और कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल को लेकर है। ऐसा भारत से पहले हुए निर्यात में पाया गया था, जिसे लेकर कुछ साल पहले शिकायतें मिली थीं। भारत के व्यापारियों और सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इस साल जब बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, ओमान, कतर और अन्य देशों में बड़े पैमाने पर गेहूं का निर्यात किया गया तब ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली।
कारोबारियों ने यह भी कहा कि माल ढुलाई की लागत भारत के आपूर्तिकर्ताओं के समक्ष बड़ी चुनौती होगी और कहा कि मंगलवार को सबसे कम ढुलाई दर 70 डॉलर प्रति टन रही।
नई दिल्ली के एक प्रमुख कारोबारी राजेश पहाडय़िा जैन ने कहा, ‘भारत के गेहूं को मिस्र पहुंचाने की ढुलाई लागत 70 डॉलर प्रति टन के करीब रही, जबकि काला सागर इलाके से आपूर्ति पर ढुलाई लागत 30 से 40 डॉलर प्रति टन पड़ती है।’ मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में भारत का गेहूं निर्यात 78.5 लाख टन पहुंच गया, जो अब तक का सर्वाधिक निर्यात है। इसके पहले के साल में 21 लाख टन निर्यात हुआ था।
खबरों के मुताबिक दोनों देशों ने आयात को मंजूरी देने के मिस्र के फैसले का स्वागत किया है। भारत कवायद कर रहा है कि वह अपने अतिरिक्त उत्पादन का लाभ उठा सके, वहीं रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला किए जाने और खरीद में व्यवधान को देखते हुए मिस्र कम दाम पर खरीद को इच्छुक है। पिछले साल मिस्र ने रूस और यूक्रेन से 80 प्रतिशत गेहूं खरीदा था।
भारत के साथ हाल के निर्यात सौदे 330 और 335 डॉलर प्रति टन फ्री ऑन बोर्ड भाव पर हुए, जो यूरोप द्वारा की गई पेशकश की तुलना में करीब 100 डॉलर प्रति टन सस्ता है, जिसकी खरीद सरकार की अनाज खरीद एजेंसी जनरल अथॉरिटी फार सप्लाई कमोडिटीज (जीएएससी) ने अपने हाल के टेंडर में की है।
रूस के यूक्रेन में हस्तक्षेप के बाद और पिछले सप्ताह हाल की खरीद के पहले जीएएससी ने 2 टेंडर रद्द कर दिए थे। उसे अभी खरीद के लिए टेंडर जारी करना है। यह अभी साफ नहीं है कि क्या वह भारत के गेहूं को मूल खरीद वाले देश के रूप में अगले टेंडर बुक में शामिल करेगा, या नहीं।

First Published - April 21, 2022 | 12:23 AM IST

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