हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) ने कुछ तेल व गैस ब्लाकों में अन्वेषण व उत्पादन गतिविधियों के लिए अनुपालन का बोझ और कम कर दिया है। नई अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति (एनईएलपी) और एनईएलपी के पहले के दौर के तहत आवंटित ब्लॉकों तक इस छूट को विस्तार दिया गया है। एनईएलपी और प्री-एनईएलपी ब्लॉकों का आवंटन 1980 और 2012 के बीच हुआ था। डीजीएच के मुताबिक एनईएलपी और प्री-एनईएलपी ब्लॉकों के उत्पादन साझा सौदों (पीएसई) के तहत दस्तावेजों की मंजूरियों व दस्तावेज दाखिल करने के अनुपालन के बोझ में राहत दी गई है। 15 अगस्त से लागू होने वाले नए नियमों के मुताबिक स्व प्रमाणन के आधार पर ऑनलाइन 9 प्रक्रियाएं व दस्तावेज स्वीकार किए जाएंगे और इनके लिए आगे किसी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी।
इनमें स्थल की समीक्षा, बदलाव या गहराई, अगले चरण में जाने के लिए नोटिस जैसी अहम प्रक्रियाएं शामिल हैं। बैंक गारंटी व कानूनी सलाह और नवीकरण व संशोधित बैंक गारंटी दस्तावेज भी स्व प्रमाणन में स्वीकार किए जाएंगे।
स्व प्रमाणन के बाद 30 दिन के भीतर 3 प्रक्रियाओं की मंजूरी की जरूरत होगी। इनमें वर्क प्रोग्राम और बजट, अप्रेजल प्रोग्राम या समीक्षा और फील्ड डेवलपमेंट प्लान या इसकी समीक्षा शामिल हैं।
अभी 6 प्रक्रियाओं के लिए सरकार से मंजूरी की जरूरत होगी। इनमें अन्वेषण के चरण का विस्तार, काम पूरा न करने की स्थिति में परिसमापन क्षति, भागीदारी हित का असाइनमेंट/हस्तांतरण शामिल है। उत्पादन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार और साइट की बहाली/परित्याग योजना शामिल हैं। उत्पादन साझा कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार, साइट बहाली और उसे त्यागने की योजना को भी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की प्रबंधन समिति से मंजूरी लेनी होगी।
डीजीएच ने एक बयान में कहा है कि यह ढील अप्रैल, 2020 में प्रक्रियाओं के सरलीकरण की पहल का विस्तार है। यह निवेश और घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने के मकसद से किया गया है।
तेल व गैस अन्वेषण और उत्पादन के क्षेत्र में एक और प्रगति हुई है। खोजे गए छोटे क्षेत्रों (डीएसएफ) की तीसरे दौर की नीलामी टाल दी गई है। डीजीएच की वेबसाइट पर नोटिस में कहा गया है, ‘डीएसएफ की तीसरे दौर की बोली की तिथि टाल दी गई है। नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी।’
इस दौर को 10 जून, 2021 को शुरू किया गया था।