उद्योग संगठन इस्मा (ISMA) ने शुक्रवार को कहा कि एथनॉल बनाने के लिए गन्ना रस के उपयोग पर ‘अचानक’ प्रतिबंध लगाने से चीनी मिलों की क्षमता उपयोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से 15,000 करोड़ रुपये का निवेश खतरे में पड़ गया है। यह वह निवेश है, जिसे हरित ईंधन संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले तीन साल में लगाया गया।
इस प्रमुख चीनी उद्योग निकाय ने यह भी आशंका जताई कि इससे गन्ना किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है। केंद्र ने हाल ही में मार्केटिंग ईयर 2023-24 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान चीनी उत्पादन में संभावित गिरावट को देखते हुए एथनॉल के लिए गन्ना रस के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने यह भी मांग की है कि सरकार मिल मालिकों की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए चीनी के उप-उत्पाद बी-हैवी और सी-हैवी शीरे से बने एथनॉल की कीमतों में जल्द संशोधन करे।
इस्मा के अध्यक्ष आदित्य झुनझुनवाला ने अपनी 89वीं वार्षिक आम बैठक में कहा, ‘‘आपूर्ति वर्ष 2023-24 में एथनॉल के लिए गन्ना रस/सिरप के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से अचानक प्रतिबंध, चीनी उद्योग के लिए एक बड़ा प्रतिरोधक है।’’ उन्होंने कहा कि प्रतिबंध ने उद्योग को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है और सरकार से इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
झुनझुनवाला ने कहा कि बी-हैवी और सी-हैवी शीरे से बने एथनॉल की कीमत को तुरंत संशोधित और घोषित करने की जरूरत है क्योंकि इससे मिलों को हालिया प्रतिबंध से संभावित नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी।
मार्केटिंग ईयर 2022-23 में भारत ने 64 लाख टन चीनी का निर्यात किया। इसने आपूर्ति वर्ष 2022-23 (नवंबर से अक्टूबर) में पेट्रोल के साथ एथनॉल का 12 प्रतिशत मिश्रण स्तर हासिल किया है। झुनझुनवाला ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में कुल चीनी उत्पादन 325 लाख टन (एथनॉल के लिए उपयोग के बिना) होने की उम्मीद है, जबकि घरेलू खपत 285 लाख टन का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सरकार आपूर्ति वर्ष 2023-24 में एथनॉल उत्पादन के लिए 17 लाख टन चीनी के अंतरण की अनुमति दे सकती है।
झुनझुनवाला ने कहा कि एथनॉल के लिए 17-20 लाख टन अतिरिक्त चीनी के इस्तेमाल की गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि उद्योग ने एथनॉल उत्पादन की क्षमता बनाने के लिए पिछले तीन साल में लगभग 15,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है और ‘यह बड़ा निवेश, जोखिम में है।’’
एथनॉल उत्पादन क्षमता तीन साल पहले 280 करोड़ लीटर से बढ़कर 766 करोड़ लीटर हो गई है। उद्योग की मांग है कि बी-हैवी शीरे से बने एथनॉल की कीमत 59 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 64 रुपये प्रति लीटर की जाए। उन्होंने कहा कि सी-हैवी शीरे की दर 49 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 58-59 रुपये प्रति लीटर करने की जरूरत है।