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अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से रुपये की 5 दिन की गिरावट थमी, बॉन्ड में भी आई तेजी

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर सहमति बनने की खबरों के बाद तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई

Published by
अंजलि कुमारी   
Last Updated- May 06, 2026 | 11:09 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त होने की संभावना के संकेतों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे रुपया मजबूत हुआ और बॉन्ड की कीमतें बढ़ गईं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर सहमति बनने की खबरों के बाद तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध एक समझौते के जरिये खत्म हो सकता है। साथ ही, चेतावनी भी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो हमले फिर शुरू हो जाएंगे।

रुपये ने लगातार 5 दिनों से हो रही गिरावट पर विराम लगाते हुए 0.72 फीसदी की बढ़त हासिल की और 94.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ जबकि एक दिन पहले यह 95.29 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। 

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक और ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, रुपया ओवरसोल्ड दिख रहा था और इसमें सुधार की गुंजाइश थी। आरबीआई ने 95.45 के स्तर पर कदम बढ़ाया और सुनिश्चित किया कि रुपया 95.50 के स्तर को पार न करे। वहीं, एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) मंगलवार को इक्विटी बेच रहे थे, लेकिन उन्होंने बुधवार को खरीदारी की होगी और डॉलर बेचे होंगे।

एशियाई मुद्राओं में भारतीय मुद्रा का प्रदर्शन बुधवार को बेहतर प्रदर्शन करने वालों में रहा। दक्षिण कोरियाई वॉन, जापानी येन, थाई बहत और मलेशियाई रिंगिट ने रुपये से बेहतर प्रदर्शन किया। 

बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 10 आधार अंक नरम होकर 6.92 फीसदी रही जबकि पिछली बार यह 7.02 फीसदी पर बंद हुई थी। यह 8 अप्रैल, 2026 के बाद से इसमें आई सबसे बड़ी गिरावट थी जब 40 दिन की लड़ाई के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के सशर्त संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी।  

प्राइमरी डीलरशिप के एक डीलर ने कहा, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण बॉन्ड बाजार में तेजी आई। इस उम्मीद के कारण तेल की कीमतें नीचे आ गईं कि अमेरिका-ईरान संघर्ष अब खत्म होने वाला है और चीन का भी दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी यील्ड में नरमी आई और रुपया मजबूत हुआ, जिससे कुल मिलाकर जोखिम को लेकर सेंटिमेंट में सुधार आया। शेयर बाजार भी ऊपर चढ़े, जिससे बॉन्ड बाजार को सहारा मिला। 

10 साल के बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर यील्ड के आने वाले समय में एक सीमित दायरे में ट्रेड करने की संभावना है। डीलर ने कहा, इस समय यील्ड का 6.90 फीसदी से नीचे जाना मुश्किल है और हमें यहां से 6.90 फीसदी से 6.96 फीसदी के बीच का दायरा दिख रहा है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि वॉशिंगटन और तेहरान संघर्ष खत्म करने के लिए एक पेज की सहमति के करीब हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें दिन में गिरकर लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं; इससे तनाव कम होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

बाजार के जानकारों ने कहा कि केंद्रीय बैंक के दखल और निवेशकों की सतर्क पोज़िशनों ने भी दिन के कारोबार में स्थानीय मुद्रा को सहारा दिया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, केंद्रीय बैंक के दखल और जोखिम से बचने की भावना ने स्थानीय मुद्रा को अतिरिक्त सहारा दिया। बाजार तनाव में संभावित कमी और आपूर्ति की दिक्कतें घटने को ध्यान में रख रहे हैं।

First Published : May 6, 2026 | 10:34 PM IST