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डॉलर के मुकाबले रुपया 5 हफ्ते के हाई पर, तेल कीमतों में गिरावट और RBI के कदमों से मिला सहारा

कारोबार की समा​प्ति पर रुपया 0.42 फीसदी बढ़कर 94.72 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। शुक्रवार को यह 95.11 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- June 15, 2026 | 11:34 PM IST

डॉलर के मुकाबले रुपया आज कारोबार के दौरान मजबूत होकर 8 मई के बाद के अपने 5 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की घोषणा से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और विदेशी पूंजी लाने के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उपायों से रुपये को बल मिला। मुद्रा डीलरों ने इसकी जानकारी दी।

कारोबार की समा​प्ति पर रुपया 0.42 फीसदी बढ़कर 94.72 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। शुक्रवार को यह 95.11 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। आज की तेजी के बाद रुपये ने अप्रैल से अभी तक हुए कुल नुकसान की भरपाई कर ली है। अमेरिका-ईरान के बीच शुरुआती समझौते की खबरों के बाद कच्चे तेल के दाम 5 फीसदी से ज्यादा नरम होकर 83 डॉलर प्रति बैरल होने से कारोबार के दौरान रुपया 94.45 प्रति डॉलर तक सुधर गया था।

जून में डॉलर के मुकाबले रुपया 0.3 फीसदी की मजबूत हुआ है। फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये में 3.94 फीसदी की गिरावट आई है। कोटक सिक्योरिटीज में जिंस और मुद्रा शोध प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा, ‘हमारा मानना ​​है कि यह एक बार होने वाली तेजी के बजाय ज्यादा टिकाऊ सुधार की शुरुआत है। अब दो मजबूत सकारात्मक कारक एक साथ मिल रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अगले एक-दो हफ्तों में रुपया मजबूत होकर 94 प्रति डॉलर के स्तर तक आ सकता है। अगर रुपये में इससे ज्यादा सुधार होता है तो अगले 2 से 3 महीनों में 93 प्रति डॉलर और शायद 92.5 प्रति डॉलर तक पहुंचने का रास्ता खुल जाएगा। फिलहाल 94 प्रति डॉलर का स्तर अहम है और उसके बाद 93 प्रति डॉलर का स्तर देखना होगा।’

पिछले महीने तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपया कमजोर होकर 97 प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया था लेकिन अब इसमें रिकॉर्ड निचले स्तर से लगभग 2.5 फीसदी का सुधार हुआ है।

मॉर्गन स्टेनली ने अपने ग्राहकों को भेजे एक नोट में कहा, ‘रुपये पर दबाव थोड़ा घटा है। नियामक और सरकार पूंजी लाने के तरीकों पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि घोषित उपाय भुगतान संतुलन को उचित स्तर पर बनाए रखने के लिए पर्याप्त होंगे।’ नोट में कहा गया, ‘इन उपायों से रुपये को स्थिर करने में मदद मिलेगी और आगे की स्थिति तेल की कीमतों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगी।’

10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर यील्ड भी 2 आधार अंक घटकर 6.87 फीसदी रह गई जो इस साल 15 अप्रैल के बाद से सबसे निचला स्तर है।  एक प्राइमरी डीलरशिप के डीलर ने कहा, ‘बॉन्ड यील्ड के 6.85 फीसदी से 6.95 फीसदी के मौजूदा दायरे में बने रहने की उम्मीद है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और शांति समझौते की उम्मीद से सुधार हुआ लेकिन ठोस संकेतों के अभाव में यहां से यील्ड में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है।’

बाजार के जानकारों का कहना है कि तेल की कम कीमतों और विदेशी मुद्रा जमा तथा विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई के हालिया कदमों से रुपये को लेकर धारणा बेहतर हुई है।

इन उपायों में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर से छूट, चुनिंदा लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड और ग्रीन बॉन्ड के लिए पूर्णत: सुलभ मार्ग (एफएआर) का विस्तार, प्रवासियों के लिए निवेश के ज्यादा मौके और 30 सितंबर तक के नए 3 से 5 साल के एफसीएनआर (बी) जमा पर आरबीआई द्वारा हेजिंग का खर्च उठाने का फैसला शामिल है।

डीलरों का अनुमान है कि इन कदमों से आने वाले महीनों में 40 से 55 अरब डॉलर का निवेश आ सकता है। ट्रेडरों का कहना है कि अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर 70 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर के आस-पास आई तो भारत के आयात बिल और चालू खाता घाटा पर दबाव कम हो सकता है। साथ ही वैश्विक जोखिम लेने की बेहतर क्षमता से शेयर बाजार में और निवेश आ सकता है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपये को और मजबूती मिल सकती है।

First Published : June 15, 2026 | 11:30 PM IST