कमोडिटी

9 दिन बाद संभला रुपया, RBI के दखल और कच्चे तेल में नरमी से मिली बड़ी राहत

रुपया 65 पैसे मज़बूत होकर 96.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि एक दिन पहले यह 96.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

Published by
अंजलि कुमारी   
Last Updated- May 21, 2026 | 10:30 PM IST

डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार नौ दिनों से चली आ रही गिरावट गुरुवार को थम गई और यह सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा बन गया। इसमें भारतीय के नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड्स (एनडीएफ) मार्केट में आरबीआई के भारी दखल और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का योगदान रहा। डीलरों ने बताया कि केंद्रीय बैंक के ज़ोरदार दखल के बाद ट्रेडिंग शुरू होने से पहले ही घरेलू मुद्रा मजबूत होकर करीब 96 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। रुपया 65 पैसे मज़बूत होकर 96.20 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि एक दिन पहले यह 96.83 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एक साल का डॉलर/रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम भी कम हुआ। एक साल का फॉरवर्ड रेट बुधवार के 100.25 के मुकाबले 99.73 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले सत्र में स्थानीय मुद्रा पर लगातार दबाव के बीच यह 100.33 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया था। रुपये में यह रिकवरी तब हुई जब ज्यादातर एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला रुख देखने को मिला।

आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक साल में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 11.2 फीसदी गिरा है, जिससे इस दौरान यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्राओं में से एक बन गया। हालांकि गुरुवार को इसने 0.65 फीसदी की बढ़त के साथ अपने क्षेत्रीय समकक्षों से बेहतर प्रदर्शन किया।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, भारतीय रुपया लगातार नौ दिनों की गिरावट के बाद एशिया की सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है। यह रिकवरी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद हुई है, जो भू-राजनीतिक तनाव में कमी के शुरुआती संकेतों और केंद्रीय बैंक के सक्रिय दखल के कारण संभव हुई है।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं, जबकि एक दिन पहले यह 109 डॉलर प्रति बैरल थीं। डॉलर इंडेक्स भी गिरकर 99.12 पर आ गया जबकि एक दिन पहले यह 99.44 पर था। यह इंडेक्स छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापता है।

परमार ने कहा, आगे चलकर निवेशकों का ध्यान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा पर रहेगा। तकनीकी नजरिये से देखें तो हाजिर डॉलर-रुपये को 95.74 पर मजबूत समर्थन मिल रहा है जबकि प्रतिरोध का तात्कालिक स्तर 96.50 पर सीमित है।

इस बीच, बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 4 आधार अंक बढ़कर 7.11 फीसदी हो गई। बाज़ार का एक हिस्सा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण मुद्रास्फीति के जोखिमों को देखते हुए जून की नीति में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के अर्थशास्त्रियों ने कहा, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के ऊंचे रहने के अनुमानों को देखते हुए हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 27 में जून में दरों में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी होगी, जिससे दरें 5.75 फीसदी तक पहुंच जाएंगी। इससे पहले, स्टैंडर्ड चार्टर्ड को वित्त वर्ष 27 में दरों में किसी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं थी। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि रुपये के उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से गिरने से सीपीआई पर दूसरी श्रेणी के असर का जोखिम बढ़ जाता है। हमारी राय में इससे दरों में बढ़ोतरी की संभावना और मजबूत हो जाती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, हमें 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो जून और अगस्त के बीच बराबर-बराबर बांटी जाएगी। हालांकि, अगर जून में कोई बढ़ोतरी नहीं होती है तो अगस्त में रीपो दर को 50 आधार अंक तक बढ़ाया जा सकता है।

पिछली 12 मई को स्विस नैशनल बैंक (एसएनबी) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा आयोजित एक पैनल चर्चा में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा था कि केंद्रीय बैंक इस बात पर कड़ी नजर रख रहा है कि आपूर्ति का झटका कब और कैसे सामान्य मूल्य स्तर में शामिल हो सकता है, जिसके लिए मौद्रिक नीति संबंधी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।

2025 में नीतिगत रीपो दर में 125 आधार अंकों की कटौती करने के बाद केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय दर निर्धारण स​मिति ने 2026 में हुई दो बैठकों में इस दर को अपरिवर्तित रखा। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 3-5 जून को निर्धारित है।

First Published : May 21, 2026 | 10:27 PM IST