कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और शेयर बाजार में बिकवाली के चलते बुधवार को रुपये में गिरावट आई। स्थानीय मुद्रा 91.81 प्रति डॉलर के पिछले बंद भाव के मुकाबले 92.04 प्रति डॉलर पर बंद हुई। डीलरों ने यह जानकारी दी। पिछले दो हफ्तों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति में इजाफा किया है और कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है, जिससे रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत पिछले दिन के 98.63 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले बढ़कर 99.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। बाजार के जानकारों का कहना है कि सरकारी बैंकों ने संभवतः भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से डॉलर बेचकर और नुकसान को रोकने की कोशिश की।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, क्षेत्रीय मुद्राओं के मिले-जुले प्रदर्शन के बावजूद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर हुआ है। केंद्रीय बैंक द्वारा डॉलर की आपूर्ति से नुकसान को सीमित करने में मदद मिली है, लेकिन आयातकों की मजबूत मांग मुद्रा को लगातार नीचे खींच रही है। उन्होंने कहा, निकट भविष्य में हाजिर अमेरिकी डॉलर को 91.60 प्रति डॉलर पर तत्काल समर्थन मिल रहा है जबकि 92.40 प्रति डॉलर पर महत्वपूर्ण प्रतिरोध देखा जा रहा है।
डॉलर की सख्त लिक्विडिटी के कारण भी मुद्रा पर दबाव बना हुआ है, जिसका आंशिक कारण घरेलू इक्विटी और ऋण बाजारों से पूंजी की निकासी है। एशियाई मुद्राओं में उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन डॉलर सूचकांक पिछले दिन के 98.63 के मुकाबले 99.06 पर टिका। डॉलर सूचकांक छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है। एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, आरबीआई का समर्थन तो मिला, लेकिन इक्विटी और बॉन्ड दोनों में एफपीआई द्वारा लगातार बिकवाली के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।
बुधवार को डॉलर सूचकांक में वृद्धि हुई क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष तेज हो गया। इजरायल ने रात भर ईरान को निशाना बनाया जबकि ईरान ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जो ईरान के खिलाफ आक्रामकता का आधार हैं।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, डॉलर की बोलियों की मात्रा रुपये को कमजोर बनाए रखेगी, इसलिए आयातकों के लिए हर गिरावट और बड़ी गिरावट पर डॉलर खरीदना समझदारी भरा कदम होगा। हमें मार्च 2025 के महीने में कुछ प्रवाह की उम्मीद थी, लेकिन विभिन्न कारणों से ऐसा नहीं हो पाया, जिनमें सबसे हालिया कारण ईरान युद्ध है।