मार्च में रूस से भारत आने वाला कोयला 2 साल से ज्यादा समय के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है, क्योंकि भारत के खरीदारों ने रूस के बाजार से खरीद जारी रखी है, जो प्रतिबंधों के कारण अलग थलग पड़ रहा है। जहाजों से कम से कम 10.6 लाख टन कोकिंग कोल आ रहा है, जो मुख्य रूप से स्टील निर्माण में इस्तेमाल होता है। वहीं थर्मल कोल का इस्तेमाल प्राथमिक रूप से बिजली उत्पादन में होता है, जो मार्च में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाला है। यह जनवरी 2020 के बाद सर्वाधिक बड़ी खेप होगी। कंसल्टेंसी फर्म कप्लर के आंकड़ों से यह पता चलता है। भारत को कोकिंग कोल और थर्मल कोल की आपूर्ति करने के मामले में रूस छठा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, जो चीनी व भारतीय खरीदारों को प्रतिस्पर्धी दरों पर आपूर्ति कर सकता है क्योंकि यूरोपीय व अन्य ग्राहक प्रतिबंधों के कारण दूर हो गए हैं।