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झींगा निर्यात को जापान से खतरे की घंटी

Last Updated- December 10, 2022 | 11:46 PM IST

भारतीय समुद्री खाद्य पदार्र्थों का जापान को होने वाला निर्यात खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।
जापान के फूड ऐंड सेफ्टी अथॉरिटी (जेएफएसए) ने भारत से भेजी जाने वाली कल्चर्ड झींगा में पेंडीमेथलीन (कीटनाशक) का अंश पाया है, जो निर्धारित मात्रा से कहीं ज्यादा है। इस घटना से समुद्री खाद्य निर्यात उद्योग को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि जापान, यूरोपीय संघ के बाद इसका दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है।
अगर भारत के खिलाफ कोई वैधानिक कार्रवाई की जाती है, तो इसका सीधा असर निर्यात पर पड़ेगा। मंदी की मार से पहले से ही जूझ रहे इस कारोबार और यूरोप तथा अमेरिका से मांग निरस्त होने के बाद इस खबर से समुद्री खाद्य उद्योग दबाव में आ गया है।
सूचना के मुताबिक तूतीकोरिन बंदरगाह से निर्यातित माल में जांच के दौरान कीटनाशक मिले हैं। इस परिप्रेक्ष्य में जापान के स्वास्थ्य, श्रम और सामाजिक कल्याण मंत्रालय ने अपने अधिकारियों को सचेत किया है कि वे भारत से आयातित झींगा की जांच और निरीक्षण कार्यो में कड़ाई बरतें।
अधिकारियों ने गुणवत्ता जांच की गति बढ़ा दी है और भारत से आने वाले माल की 30 प्रतिशत जांच हुई है। मंत्रालय ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर अब भी गुणवत्ता में कोई कमी पाई जाती है तो भारत से आने वाली झींगा की शत प्रतिशत जांच की जाएगी। 
निर्यात क्षेत्र से जुड़े सूत्रों ने कहा कि समुद्री खाद्य के निर्यात पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि भारतीय पदार्थों के लिए जापान एक उभरता हुआ बाजार है। अगर इससे कोई जोखिम होता है तो भारतीय झींगा के आयात पर जापान सरकार पूरी तरह से प्रतिबंध लगा सकती है।
बहरहाल, मैरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमपीईडीए) ने तूतीकोरिन की कंपनी को सचेत किया है कि वह गुणवत्ता के मानकों का कड़ाई से पालन करे। साथ ही अथॉरिटी ने सीफूड एक्सपोर्ट एसोसिएशन आफ इंडिया को भी इस मामले में आगाह किया है कि प्रसंस्करण और पैकेजिंग के दौरान जापान को निर्यात की जाने वाली झींगा के मामले में मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
अगर किसी तरह की लापरवाही बरती गई तो जापान, भारतीय झींगा के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा सकता है। एमपीईडीए के सूत्रों ने कहा कि जेएसएफए ने केवल एक ही सौदे में कीटनाशक पाया है और यह कंपनी द्वारा जानबूझकर नहीं किया गया है। शायद ऐसा इसलिए हुआ है कि ऐसे पानी का प्रयोग किया गया, जिसका इस्तेमाल कृषि कार्यों में होता है। 
अथॉरिटी ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने को कहा है, जिससे भविष्य में होने वाली किसी भी परेशानी से बचा जा सके। निर्यात क्षेत्र को हाल ही में अमेरिका से कुछ अच्छी खबर मिली थी, जब अमेरिका ने एंटी डंपिंग डयूटी कम करने और सीमा बॉन्ड जरूरतों को वापस ले लिया था।
लेकिन हालिया घटनाक्रम में जापान की ओर से खतरे की घंटी बज गई है। भारत के कुल समुद्री खाद्य के निर्यात में 22 प्रतिशत निर्यात जापान को होता है।

First Published - April 8, 2009 | 9:59 PM IST

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