ग्रीष्मकालीन धान का रकबा 7.68 फीसदी बढ़कर 30.69 लाख हेक्टेयर हो गया है।
Summer Crops: इस साल ग्रीष्मकालीन फसलों की बोआई की रफ्तार सामान्य से धीमी दिख रही है। हालांकि सामान्य रकबे के करीब दो तिहाई क्षेत्र में बोआई हो चुकी है। फिर भी कई प्रमुख फसलों में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में सुस्ती नजर आ रही है। पिछले सप्ताह तक ग्रीष्मकालीन फसलों के रकबा में करीब 5 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। राहत की बात यह है कि दलहन फसलों की बोआई में बढ़त दर्ज की गई है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक 27 मार्च 2026 तक देश में ग्रीष्मकालीन फसलों का कुल रकबा 49.87 लाख हेक्टेयर दर्ज हुआ है, जो पिछले साल की समान अवधि के 52.35 लाख हेक्टेयर से 4.97 फीसदी कम है। 2025 में ग्रीष्मकालीन फसलों का अंतिम रकबा 83.92 लाख हेक्टेयर रहा था, जबकि इन फसलों का सामान्य रकबा 75.37 लाख हेक्टेयर है। इस लिहाज से अब तक सामान्य रकबे के करीब दो तिहाई यानी करीब 66 फीसदी क्षेत्र में बोआई हो चुकी है।
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इस सीजन में दलहन फसलों का रकबा 6.06 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के 5.60 लाख हेक्टेयर से 8.21 फीसदी ज्यादा है। मूंग का रकबा 7.12 फीसदी बढ़कर 3.91 लाख हेक्टेयर हो गया। उड़द का 7.35 फीसदी बढ़कर 1.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। अन्य दलहनों में भी 47 फीसदी से अधिक की बढ़त दर्ज की गई।
ग्रीष्मकालीन धान का रकबा 7.68 फीसदी बढ़कर 30.69 लाख हेक्टेयर हो गया है। श्री अन्न व मोटा अनाज का कुल रकबा 3.81 फीसदी घटकर 9.34 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में 9.71 लाख हेक्टेयर था। ज्वार का रकबा पिछले साल के 0.35 लाख से घटकर 0.26 लाख हेक्टेयर और मक्का का 6.91 लाख से घटकर 6.36 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि बाजरा का पिछले साल के 2.29 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.50 लाख हेक्टेयर और रागी का 0.13 लाख से बढ़कर 0.20 लाख हेक्टेयर हो गया।
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ग्रीष्मकालीन सीजन में तिलहन फसलों की बोआई भी सुस्त हो रही है। 27 मार्च तक 5.97 लाख हेक्टेयर में तिलहन फसलें बोईं गई हैं, जो पिछले साल इसी अवधि में बोई गईं 6.34 लाख हेक्टेयर से करीब 6 फीसदी कम हैं। इस सीजन की प्रमुख तिलहन फसल मूंगफली का रकबा पिछले साल के 4.08 लाख से घटकर 3.56 लाख हेक्टेयर रह गया। हालांकि इस दौरान तिल का रकबा 1.91 लाख से बढ़कर 2.02 लाख हेक्टेयर हो गया।