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राज्यों को आदर्श एपीएमसी कानून अपनाने पर होगा ध्यान

Last Updated- December 11, 2022 | 11:23 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों विवादास्पद कृषि अधिनियमों को निरस्त किए जाने की घोषणा के बाद अधिकारियों ने कहा कि राज्यों को आदर्श एपीएमसी कानून अपनाने के लिए राजी करने पर ध्यान केंद्र्रित किया जाएगा जो कुछ साल पहले घोषित किए गए थे और अगर संभव होता है, तो उनके अपनाने को किसी प्रकार के वित्तीय लाभ से जोड़ा जा सकता है, जैसा कि 15वें वित्त आयोग ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में सुझाव दिया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जहां तक ​​अनुबंध खेती का संबंध है, तो हमारे पास पहले से ही एक आदर्श अधिनियम है और राज्यों को उसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि व्यापार अधिनियम के मामले में पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) प्लेटफॉर्म प्रत्यक्ष रूप से बिक्री और खरीद का विकल्प प्रदान कर रहा है और तीसरे के मामले में, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसी अधिनियम) में संशोधन है, हां, उसके लिए पहले की तरह की स्थिति को बहाल किया जाएगा। केंद्र ने कुछ साल पहले एपीएमसी में सुधार और अनुबंध खेती के संबंध में भी दो आदर्श अधिनियमों को परिचालित किया था जिसे कुछ राज्यों द्वारा अपनाया जा चुका है।
इन्हें आदर्श कृषि उत्पाद विपणन (विनियमन) अधिनियम-2017 और कृषि उत्पाद एवं पशुधन अनुबंध कृषि तथा सेवाएं (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम, 2018 (एपीएलसीएफए या अनुबंध कृषि अधिनियम) कहा गया था।
15वें वित्त आयोग ने अपने प्रदर्शन-आधारित अनुदान के एक हिस्से को उन राज्यों से जोडऩे का सुझाव दिया था, जो भूमि पट्टे के संबंध में एक कानून के साथ इन आदर्श कानूनों को अपनाते हैं।
इससे पहले भी केंद्र राज्यों को अलग-अलग स्तर की सफलता के साथ अपने कृषि विपणन कानूनों में सुधार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बार-बार प्रयास कर चुका था।
आईआईएम अहमदाबाद में सेंटर फॉर मैनेजमेंट इन एग्रीकल्चर के चेयरपर्सन प्रोफेसर सुखपाल सिंह ने कहा कि साफ तौर पर केंद्रीय कानूनों का मौजूदा सेट लागू होने से पहले भी राज्य कृषि सुधार कर रहे थे, जो इसी तरह जारी रहेगा।
दिलचस्प बात यह है कि इन अधिनियमों के संबंध में आंदोलनकारी किसानों के साथ 11 दौर की बातचीत के दौरान केंद्र सरकार द्वारा सुझाए गए संशोधनों का उद्देश्य राज्य को मंडियों के बाहर व्यापार को विनियमित करने की शक्ति देना था।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) के दक्षिण-एशिया के पूर्व निदेशक और तीन अधिनियमों का अध्ययन करने और आगे का मार्ग सुझाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति का हिस्सा रहे पीके जोशी ने कहा कि इन अधिनियमों को निरस्त करने के फैसले से कृषि के बड़े निवेश पर असर पड़ेगा। जोशी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा ‘मुझे लगता है कि इस क्षेत्र में निवेश प्रभावित होगा, चाहे वह घरेलू हो या एफडीआई तथा हम सभी जानते हैं कि उत्पादकता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कृषि को बड़े निवेश की जरूरत है।’

First Published - November 21, 2021 | 11:21 PM IST

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