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मांग बढ़ने से स्टील उद्योग में मजबूती

Last Updated- December 10, 2022 | 9:45 PM IST

चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में स्टील उद्योग इसके पूर्व की तिमाही की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने को बेताब है।
इसकी वजह यह है कि बिक्री बढ़ी है, माल का भंडार कम हुआ है और कुछ कंपनियों ने कच्चे माल के लिए सौदे पर फिर से मोलभाव किया है, जिससे सस्ता कच्चा माल मिल सके।
अक्टूबर-दिसंबर माह के दौरान कंपनियों द्वारा उत्पादन में भारी कटौती किए जाने के बाद जनवरी से कंपनियों ने सामान्य उत्पादन शुरू कर दिया। इसकी प्रमुख वजह यह है कि मांग में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही कंपनियों ने घरेलू बाजार पर ध्यान देना शुरू किया है, जहां वैश्विक मंदी का प्रभाव नहीं है, जिसकी वजह से बिक्री में उल्लेखनीय सुधार आया है।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि जनवरी के बाद से हर महीने मांग में क्रमिक सुधार आ रही है। जनवरी-मार्च 2008 के दौरान हॉट रोल्ड क्वायल की कीमतें 40,000-41,000 रुपये प्रति टन के करीब रहीं। जबकि जनवरी-मार्च 2009 के दौरान कीमतें घटकर 31,000-32,000 रुपये प्रति टन पर आ गईं।
बहरहाल कुछ कंपनियां कीमतों को लेकर दोबारा मोलभाव करने में सफल रहीं, जिसकी वजह से मुनाफे के मामले में उन्हें राहत मिल गई। एंजेल ब्रोकिंग के विश्लेषक पवन बिर्डे के मुताबिक, ‘पिछले साल की चौथी तिमाही में भी कीमतें उच्च स्तर पर थीं, लेकिन उस समय मात्रा की समस्या थी। इस बार राजस्व कुछ मामले में ज्यादा हो सकता है, लेकिन मुनाफे पर दबाव रहेगा। जेएसडब्ल्यू और टाटा स्टील ने बहरहाल कीमतों को लेकर मोलभाव किया और फिर से सौदे किए, इसलिए तिमाही के लिहाज से उनका प्रदर्शन बेहतर रहेगा।’
अगर अलग अलग कंपनी के लिहाज से देखें तो लौह अयस्क के मामले में टाटा स्टील 100 प्रतिसत सुरक्षित है, जबकि कोकिंग कोल के मामले में 60 प्रतिशत। जेएसडब्ल्यू ने रियो टिंटो के साथ कीमतों को लेकर दोबारा मोलभाव किया, जो पिछले साल में हुए सौदे की तुलना में 43 प्रतिशत सस्ता है। 
पिछले साल कोकिंग कोल के सौदे में 200 प्रतिशत कीमतों में बढ़त हुई थी। जेएसडब्ल्यू स्टील कोकिंग कोल की जरूरतों के लिहाज से आयात पर 100 प्रतिशत निर्भर है। स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया (सेल) सालाना आधार पर हो सकता है कि विकास में पहले पायदान पर न हो, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पहले छह महीनों के कारोबार को जोड़कर कारोबार बेहतर होगा।
सेल की फरवरी माह में बिक्री, जनवरी की तुलना में बहुत बढ़िया रही और मार्च में भी मांग बेहतर रही। वहीं कोल्ड रोल्ड स्टील उत्पादकों में भूषण स्टील का कारोबार मात्रा और लाभ के हिसाब से पिछले साल के स्तर पर रहने की उम्मीद है।
हॉल रोल्ड स्टील ही कोल्ड रोल्ड उत्पादकों का प्रमुख कच्चा माल है। भूषण स्टील के प्रबंध निदेशक नीरज सिंघल ने कहा कि पिछले साल हॉट रोल्ड स्टील की कीमतें 1,000 से 1,200 डॉलर प्रति टन थीं, वहीं वर्तमान में इसकी कीमतें 420 डॉलर प्रति टन हैं।
(अगले अंक में: सीमेंट क्षेत्र)
जिंसों की मांग में सुधार-1
जनवरी माह से मांग बढ़नी शुरू हुई, जो अब भी जारी
जनवरी-मार्च 2009 के दौरान कीमतें घटकर 31,000-32,000 रुपये प्रति टन पर आ गईं
कुछ कंपनियां कीमतों को लेकर दोबारा मोलभाव करने में सफल रहीं
मुनाफा कम होने के आसार

First Published - March 26, 2009 | 11:23 PM IST

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