बढ़ती लागत के कारण स्टील कंपनियों ने इस महीने कीमतों में 2,000 रुपये से 3,500 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी कर दी है। जुलाई और सितंबर के बीच थोड़े राहत के बाद देसी स्टील फर्मों ने अक्टूबर में कीमतें बढ़ानी शुरू की और पहले हफ्ते में हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतों में 1,200 रुपये से 1,500 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी की। हॉट रोल्ड कॉइल को फ्लैट स्टील के लिए बेंचमार्क माना जाता है। लॉन्ग स्टील की कीमतों में करीब 3,000 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी की गई है।
फ्लैट स्टील का इस्तेमाल मोटे तौर पर ऑटोमोबाइल व देसी उपकरण में और लॉन्ग स्टील का इस्तेमाल निर्माण क्षेत्र व रेलवे में होता है। स्टील की अग्रणी कंपनियोंं ने हालांकि संकेत दिया कि फ्लैट स्टील कीमतों में पिछले महीने दो बार बढ़ोतरी की गई।
एक उत्पादक ने कहा, अक्टूबर व नवंबर से फ्लैट स्टील की कीमतें 6-7 फीसदी यानी करीब 5,000 रुपये प्रति टन बढ़ी है। लॉन्ग स्टील की कीमतें पिछले महीने से अब तक 6,000-6,500 रुपये प्रति टन बढ़ी है।
आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया के मुख्य विपणन अधिकारी रंजन धर ने कहा, कीमत बढ़ोतरी की मुख्य वजह इनपुट लागत में हुआ इजाफा है। अप्रैल-मई से इनपुट लागतों में करीब 250 डॉलर प्रति टन का इजाफा हुआ है। स्टील की कीमतों मेंं हुई ज्यादातर बढ़ोतरी इनपुट लागत में हुए इजाफे के कारण हुई है।
क्रिसिल रिसर्च की निदेशक ईशआ चौधरी ने कहा, कोकिंग कोल की कीमतें पिछले पांच महीने में तीन गुना से ज्यादा हो गई है और यह अक्टूबर में 390-400 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई। उन्होंने कहा, ऊर्जा की ऊंची लागत का जोखिम (थर्मल कोल की किल्लत के कारण) और मजबूत फेरोअलॉय (स्टील विनिर्माण के लिए कच्चा माल) की कीमतों ने बढ़ती लागत पर और दबाव बनाया है। चौधरी ने कहा, हमें लगता है कि कोयले की कीमतें अगले कुछ महीनों में उच्चस्तर पर बनी रहेगी, जो स्टील की कीमतों को अल्पावधि में ऊंचा रखेगा बावजूद इसके कि लौह अयस्ककी कीमतेंं देसी बाजार में लगातार घट रही है।
स्टील की कीमतें पिछले साल से बढ़ रही है, खास तौर से दूसरी छमाही में। जून में कीमतें अब तक के सर्वोच्च स्तर को छू गई और एचआरसी की औसत कीमत 69,500 रुपये प्रति टन हो गई।
चौधरी ने कहा, अक्टूबर 2021 में हुई कीमत बढ़ोतरी की वजह कोकिंग कोल की ऊंची कीमतें हैं, ऐसे में एचआरसी की औसत कीमत 68,350 रुपये प्रति टन हो गई। लॉन्ग स्टीलकी कीमतें हालांकि अक्टूबर में एक बार फिर औसतन 58,400 रुपये प्रति टन हो गई, जिसकी वजह बढ़ती इनपुट लागत है।
स्टील उत्पादकों ने कहा कि मौजूदा दौर की कीमत बढ़ोतरी के बाद एचआरसी की कीमतें 70,000-71,000 रुपये प्रति टन हो गई। रीबार की कीमतें 61,000 रुपये प्रति टन है।
धर ने कहा, मौजूदा बढ़ोतरी के बाद देसी कीमतें एशिया की कीमतों के बराबर हो गई। उन्होंने कहा, अभी भी देसी कीमतें हालांकि यूरोप के मुकाबले 200 डॉलर कम है और अमेरिका के मुकाबले काफी कम पर यहां स्टील मिल रहा है। हमें लगता है कि कीमतें नवंबर और दिसंबर में फिर बढ़ेगी, जिसकी वजह लागत होगी। चौधरी ने कहा, देसी मांग भी रिकवर होने की संभावना है। अब से रिकवरी सभी स्टील व यूज सेगमेंट में होने की उम्मीद है।