कृषि जिंसों के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध और दलहन के मुक्त आयात की अनुमति मार्च 2022 तक बढ़ाने के बाद केंद्र सरकार ने गुरुवार को सोया खली के स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी है, जिससे इसकी कीमतों पर काबू पाया जा सके।
उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने एक सर्कुलर में कहा है कि सोया खली के मिलर, प्रॉसेसर या संयंत्र अपने उत्पादन के 90 दिन के बराबर स्टॉक रख सकते हैं, वहीं ट्रेडर और ट्रेडिंग कंपनी सिर्फ 160 टन सोयाखली परिभाषित और घोषित भंडारण केंद्रों पर रख सकते हैं।
एक अप्रत्याशित कदम के तहत आवश्यक जिंस अधिनियम 1955 में संशोधन कर सोयाखली को इसमें शामिल कर प्रतिबंध लगाया गया है।
केंद्र ने एक बयान में कहा कि इस फैसले से केंद व सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों को सोयाखली के उत्पादन, वितरण आदि का अधिकार मिलेगा। आधिकारिक सर्कुलर के मुताबिक स्टॉक रखने की सीमा 30 जून, 2022 तक लागू रहेगी। सोयाबीन की पेराई से सोया खली मिलता है, जो पॉल्ट्री में चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री है।
भारत के सोया खली की वैश्विक बाजार में भी ज्यादा मांग है क्योंकि इसका उत्पादन गैर जीन संवर्धित स्रोतों से होता है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में भारत ने 15.6 लाख टन सोया खली का निर्यात किया, जो इस वित्त वर्ष में भारत से निर्यात होने वाली कुल खली का 42.36 प्रतिशत है। कारोबारियों ने कहा कि सोयाबीन की पेराई में 80 प्रतिशत खली और 20 प्रतिशत से कम तेल निकलता है। सोयाबीन के दाम बढऩे और विदेश के बाजारों में मांग बढऩे की वजह से घरेलू बाजार में सोया खली के दाम में तेज बढ़ोतरी हुई है।
इस साल अप्रैल और अगस्त 2021 के बीच सोया खली की दरें 60 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी हैं। इसकी वजह से इसके इस्तेमाल वाले क्षेत्र पॉल्ट्री सेक्टर की चिंता बढ़ी है और उन्होंने कमी की भरपाई के लिए मुक्त आयात की अनुमति मांगी।
इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले 12 लाख टन जीन संवर्धित खली के आयात की अनुमति दी। बहरहाल दिसंबर तक सिर्फ 8 लाख टन खली का ही आयात हुआ। आयात की अनुमति के बावजूद घरेलू बाजार में सोया खली की कीमतों में तेजी जारी रही और 17 दिसंबर को कीमतें पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 61 प्रतिशत ज्यादा थीं।
खाद्य तेल के सभी रूपों में तेजी और मजबूत मांग की वजह से तेजी के कारण प्रमुख बाजारों में सोयाबीन की कीमतें तेज रही हैं। इंदौर में 17 दिसंबर को सोयाबीन की दरें पिछले साल की समान अवधि की तुलना मेंं करीब 48 प्रतिशत ज्यादा थीं।