देश के 8 अरब डॉलर वाले अमूल डेयरी समूह ने सोमवार को कहा कि वह जुलाई से कुछ उत्पादों के मामले में रुकावट तथा अधिक इनपुट लागत के लिए कमर कस रहा है, जब प्लास्टिक के स्ट्रॉ पर सरकार का प्रतिबंध शुरू हो रहा है।
पिछले सप्ताह भारत ने जूस और दूध के छोटे पैक के साथ दिए जाने वाले स्ट्रॉ पर भावी प्रतिबंध में राहत देने से इनकार कर दिया था। इससे 79 करोड़ डॉलर वाले इस उद्योग में डर पैदा हो गया, जिसमें पेप्सिको, कोका-कोला, भारत की डाबर और पारले एग्रो जैसी कंपनियां शामिल हैं। अमूल के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी ने कहा कि अमूल ने प्लास्टिक के छोटे स्ट्रॉ को तब्दील करने के लिए कोई व्यावहारिक उपाय नहीं निकाला है और कागज वाला संस्करण संभव नहीं है। सोढ़ी ने रॉयटर्स को बताया कि सरकार की मंशा अच्छी है (लेकिन) स्ट्रॉ प्लास्टिक की कुल खपत का 0.1 प्रतिशत भी नहीं होता है। उन्होंने कहा कि इससे पूरा उद्योग प्रभावित होगा। सोढ़ी की टिप्पणी ऐसे वक्त में भारत के पेय उद्योग में बढ़ते दबाव को रेखांकित करती है, जब गर्मी के तपते मौसम में मांग बढ़ जाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदूषणकारी एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक कचरे को हटाने पर जोर दे रहे हैं, जो नदियों को अवरुद्ध कर देता है। सरकार का मानना है कि यह छोटे स्ट्रॉ कम उपयोगिता वाले उत्पाद हैं और उन्हें हटाकर कागज के स्ट्रॉ या टोंटी वाले पाउच का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
सोढ़ी ने कहा कि देश में अपने दूध और मक्खन वाले उत्पादों के मामले में अमूल घर-परिवारों के बीच जाना-पहचाना नाम है, जिसने वर्ष 2021-22 में 610 अरब रुपये की बिक्री की। यह दूध पर आधारित विभिन्न पेय पदार्थों की स्ट्रॉ के साथ छोटे पैक में भी बिक्री करती है।