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पराली जलाने में आगे आ सकती है तेजी!

Last Updated- December 12, 2022 | 12:27 AM IST

धान की पराली जलाने की घटनाओं में 15 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच 82 प्रतिशत की कमी आई है, जिसमें पंजाब व हरियाणा का प्रदर्शन बेहतर रहा है। वहीं विशेषज्ञ आने वाले दिनों में पराली जलाए जाने की घटना को लेकर आशंकित है, क्योंकि अभी धान कटाई होनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत ज्यादा बारिश के कारण प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में सितंबर में फसलों की कटाई सुस्त रही है। यह एक बड़ी वजह हो सकती है, जिसके कारण पराली नहीं जलाई गई है।
आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर में पंजाब में सामान्य से 77 प्रतिशत और हरियाणा में सामान्य से 139 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के डायरेक्टर डॉ एके सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, ‘कुछ इलाकों में धान का डंठल अभी भी भीगा हुआ है, क्योंकि उत्तर भारत में लगातार बारिश से धान काटने में देरी हुई है। बहरहाल हमें यह उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी पराली जलाने की घटनाएं पहले के वर्षों की तुलना में कम होंगी, क्योंकि किसानों  में जागरूकता बढ़ी है और वे केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा की गई कवायदों के बाद डिकंपोजर व अन्य साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि अभी इस सीजन की आगे की प्रगति देखना है क्योंकि अब तक धान की कटाई नहीं हुई है, जिसका मतलब है कि फसल सूखने के बाद यह तेज होगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद  (आईसीएआर) के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ एसके चौधरी का भी कहना है कि इस साल पराली जलाने की घटना पहले के वर्षों से कम हो सकती है, क्योंकि मशीनें बढ़ी हैं और किसानों में जागरूकता आई है।
चौधरी ने कहा, ‘देर तक बारिश के कारण मिट्टी में नमी ज्यादा है इसकी वजह से फसल की कटाई में देरी हो रही है। हमारा माना है कि उत्तर भारत में दशहरा के आसपास तेजी से कटाई होगी।’
उन्होंने कहा कि आईसीएआर कई क्षेत्रों का अध्ययन किया है, जिससे बॉयो डिकंपोजर के असर के बारे में जानकारी हो सके कि वह कितनी मददगार है।

First Published - October 6, 2021 | 11:50 PM IST

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